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Developing the best teachers

Developing the best teachers
Start Date :
Jan 22, 2015
Last Date :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

Teachers are the cornerstone of any educational system. Developing the teaching talent and incentivizing best teachers, retaining good teachers are all significant to improving the ...

Teachers are the cornerstone of any educational system. Developing the teaching talent and incentivizing best teachers, retaining good teachers are all significant to improving the quality of teaching. Views are elicited so that our higher education institutions can nurture good faculty who in turn can propel higher standards in our students.

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Showing 1631 Submission(s)
Vikalp Singh
Vikalp Singh 11 years 4 months ago
समाज में सबसे अधिक महत्त्व एवं साधन सुविधायें, यदि किसी को दिया जाता है तो उसमें सबसे प्रमुख एवं सबसे अधिक हमारे गुरुजन बन्धुओं को ही मिलनी चाहिये ताकि उनका मस्तिष्क सदा ही निश्चिन्तता पूर्वक अध्यापन में ही लगा रहे। प्रत्येक समाज में अध्यापक बन्धुओं को आदर एवं सम्मान दिया जाना चाहिये । अध्ययन-अध्यापन का कार्य ऐसे गुरुजन बन्धुओं को सौपना चाहिए जो झूठ-बेइमानी-चोरी-छल-कपट आसक्ति-ममता-स्वार्थ से परे हों अथवा इन्हें हर हालत में छोड़कर ईमान-सच्चाई-संयम-सेवा को धारण कर चुके हो|
Vikalp Singh
Vikalp Singh 11 years 4 months ago
"गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें !) जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे |" निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी
purshottam abbi Azer
purshottam abbi Azer 11 years 4 months ago
माननीय ... अक्सर देखा गया है की आम आदमी चलते- चलते ,माता-पिता ,बच्चे व् स्कूलों में मास्टर बैठे- बैठे अज्ञानता के कारण अपनी नाक में अंगूठा व् ऊँगली डाल लेते हैं ! योग साधना व् स्कूलों में प्रयोग शाला द्वारा इस गंदे कार्य हेतु अवगत करवाना अति आवशक है ! धन्यवाद आज़र
purshottam abbi Azer
purshottam abbi Azer 11 years 4 months ago
माननीय ... स्कूलों में बच्चो को पढ़ाते वक्त पुस्तकों व् कापियों के पेजों को पलटते वक्त थूक लगाने पर जुर्माना लगाने से यह आदत छूट सकती है तथा मास्टरों को थूक लगाने पर दंटित करना अति आवश्यक है ! बच्चो के माता पिता को भी स्कूलों में प्रयोग शाला द्वारा इस गंदे कार्य हेतु अवगत करवाना अति आवशक है ! धन्यवाद आज़र
Surya Chaudhary
Surya Chaudhary 11 years 4 months ago
जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना अनिवार्य होना चाहिए ।
Surya Chaudhary
Surya Chaudhary 11 years 4 months ago
दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये ।" "गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें
Pawan_11
Pawan_11 11 years 4 months ago
Today we have a lot of Ph.D. students which are working temporary. They have a qualification of NET which make him/her eligible for assistant professor but they don't have a eligibility to teach school students,why? If government will open a platform to use these Ph.D students to teach higher school students, provide employment with reform in our education system.
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 4 months ago
दोष रहित सत्य प्रधान मुक्ति और अमरता से युक्त सर्वोत्तम जीवन विधान और अमन-चैन का सुखी समृद्ध समाज स्थापित करने हेतु गुरुजन बन्धुओं को सबसे पहली तथा सबसे बड़ी जिम्मेदारी अपने ऊपर लेनी और उसे सुचारुरूप से वहन करनी चाहिये ।" "गुरुजन बन्धुओं को सर्वप्रथम तो स्वतः यह संकल्प लेना होगा कि हम ‘सद्भाव एवं सद्व्यवहार प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं प्रधान शिष्ट एवं संयमित जीवन को ही आधार बना, चलते-चलाते हुए, ‘सत्यं बद्, धर्मं चर’ (सत्य बोलें और धर्म पर रहें-चलें
Arun Kumar Gupta
Arun Kumar Gupta 11 years 4 months ago
जो जीवन का सर्वोत्तम लक्ष्य है, को ही एकमात्र लक्ष्य बनाकर आगे-पढे़-पढ़ायेंगे बढ़े बढ़ायेंगे | निष्काम कर्म की पद्धति को प्रभावी तरीके से लागू करना-कराना चाहिए । सच्चे सम्पन्न-विकसित नागरिकता हेतु निष्कामी कर्मचारी अधिकारी होना अनिवार्य होना चाहिए ।