Arun Kumar Gupta
11 years 4 months ago
‘‘सा विद्या या विमुक्तये’’
अर्थात् ‘‘विद्या वही है जो मुक्ति दे’
‘‘विद्या वही है जो मुक्ति दे शंष तो अविद्या के अन्तर्गत आता है । विद्या की यथार्थता
को जानने वाला ही अविद्या को भी जानता है और जो विद्या की यथार्थता को समझ नहीं
पाता, वह अविद्या की यथार्थता को भी नहीं समझ पाता है । दूसरे शब्दों में पारिवारिक
एवं सांसारिक बन्धनों से मुक्त कराने वाली जानकारी मात्र ही विद्या है । वह विद्या-विद्या
नहीं जो कर्म बन्धनों से मुक्ति न दिला सके । http://vidyatattvam-paddhati.blogspot.in/
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