Home | MyGov

Accessibility
Accessibility Tools
Color Adjustment
Text Size
Navigation Adjustment
Screen Reader iconScreen Reader

Make Popular Destinations More Tourist Friendly

Make Popular Destinations More Tourist Friendly
Start Date :
Jan 01, 2015
Last Date :
Jul 17, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

How do we make popular destinations more tourist friendly in terms of infrastructure, facilities and accessibility?

How do we make popular destinations more tourist friendly in terms of infrastructure, facilities and accessibility?

Reset
Showing 6387 Submission(s)
Arun kumar
Arun kumar 11 years 8 months ago
Popular destinations like sarnath are lacking gov attention. Road leading to destination r realy in poor condition. Step must b taken in that area. Tourists have prejudice that they will b looted while purchasing any item at spot so laws should b titghtnd and surprise visit in disguise must b done. Punishing few may change mindset of many cheaters
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
राष्ट्रीयता,ईमानदारी की बात करना इन आँखों का पानी सूखा चुके कार्यपालिका से सबसे बड़ी बेवकूफी होगी , इसके लिये सभी ज़िम्मेदार विभाग को राष्ट्रहित में विकास वाली परियोजनाओं में जिम्मेदारी दी जाय एवं पूर्ण ना होने पर दंडात्मक कार्यवाही (जबरन रिटायर) कर दिया जाय। ऐसे बहुत से समस्याए है जिनको लिखकर बताना संभव नहीं हो पा रहा है
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
नहीं है , प्रतिनीधि के आते ही घंटे या दिन में ही हो जाते है। >> सड़क के निर्माण में एनवायर्नमेंटल क्लेअरन्सेस यदि मुक्त रखा गया है तो इसमे उपयोग होने वाले स्टोन , मिटटी एवं सैंड इत्यादि को क्यों नहीं मुक्त रखा गया है यह विरोधाभास क्यों है ,काम तो दोनों ही हाल में नहीं हो पायेगा। तो कार्यदाई संस्था को क्यों बेवकूफ बनाया जा रहा है. अपने ही देश में काम करने की सजा अपने ही लोग अपनों के ही बेशर्मी से पाते है। राष्ट्रीयता,ईमानदारी की बात करना इन आँखों का पानी सूखा चुके कार्यपालिका से सबसे बड़ी बेवकू
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
दिन ही में पूरा कर लेते है हफ्ता भी नहीं होता है ,ऐसा क्यू होता है ?. >> सड़क पे आ रही बिजली पोल के लिये सम्बंधित विभाग को एस्टीमेट तैयार करने में क्यों कई महीना लग जाता है , सीधी रोड पे एवं अपने क्षेत्राधिकार में सुविधा उपलब्ध करने के बावजूद भी ऐसा क्यों करते है आपके समज में शायद आ रहा है , ? >> भू अवाप्ति में यदि राजस्वा विभाग के रिकॉर्ड में कोई कमी है तो उसको पूर्ण करने में सिर्फ उन्ही को अधिकार है फिर यूजर एजेंसी या कार्यदायी संस्था का इंतज़ार क्यों करते है मात्र समयसीमा नहीं होने से कोई डर
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
यूजर एजेंसी की तरफ से कोई प्रतिनीधि हो लेता है मात्र दिनों में ही हो जाता है क्यू?ऽ अप कहेंगे की उनको करना क्या है मालूम नहीं होता है यूजर एजेंसी (सरकारी) होती है उसके फॉलोअप से नहीं होता है वही कार्यदाई संस्था के प्रतिनीधि से आश्चर्य जनक रूप से महीनो का मात्र दिन में ही हो जाता है, >> फारेस्ट क्लीयरेंस के लिये वन विभाग में इसी क्रम में साल से ऊपर हो जाता है , यदि आप ये कहते है की शायद क्षेत्र में समय लगता है लेकिन यूजर एजेंसी / कार्यदाही संस्था के प्रतिनीधि के साथ मिलकर दिन ही में पूरा क
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
:- कुछ छोटी छोटी समस्याओ से अवगत करा रहा हु ,उसका समाधान आपकी सरकार कैसे करेगी आप जानिये ???. >> सड़क निर्माण में ट्री कटाई का परमिशन रेवेनुए और फारेस्ट (जिसके क्षेत्राधिकार) में आता है उनको देना होता है पटवारी /रेंजर के पीछे महीनो क्यों नाचना पडता है यूजर एजेंसी की तरफ से पूरी तरह से सुविधाये उपलब्ध करने के बाद भी ,क्या इससे जयादा के लिये। देश के विकास को अवरुद्ध करते है उसके, बाद तहसील स्तर पर फिर अनुविभागिये अधिकारी स्तर पर इसी तरह अंतिम तक लेकिन यदि यूजर एजेंसी की तरफ से कोई प्रतिनीधि हो ल
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
ऐसे मिले है जिनसे राष्ट्रीयता की भावना काम में ईमानदारी दिखाई पड़ी, जिनके कार्यालय में सड़क निर्माण से सम्बंधित कोई भी फाइल स्वतः समयनुसार चल रही थी. बाकी ९५ % से अधिक अमर्यादित तरीके से पेश आते है समयसीमा नहीं होने से किसी प्रकार का कोई दंडात्मक कार्यवाही लागु नहीं होने देशहित के प्रति नाममात्र की जिम्मेदारी महसूस नहीं करते है.
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
शिलान्यास करा देने से ही निर्माण पूर्ण नहीं हो जाता है ,सरकार को अपने विवेक के अनुसार (आमजन के भाषा में) सरल नियम बनाकर देश को विकास के मार्ग पर ले जाना चाहिये और नौकरशाहों के विवेक से बने भाषा में नियम जो की स्वयं ही अपने आदेशो का विरोधाभास जैसा दीखता है (९५ %) जनसाधारण जिनके लिये बना है उनके समझ के परे होता है जिसका उसको अमल करने वाले विभाग भी सिर्फ नकरात्मक मतलब निकाल कर राष्ट्रीय विकास को अवरुद्ध करने में विश्वास करते है। विगत वर्षो में मुझे सिर्फ उंगली पे गिनकर ३ अफसर
Avinash Srivastava
Avinash Srivastava 11 years 8 months ago
विकास को गति देने के लिये सुझाव अपने १०६ पृष्टो के रिपोर्ट में अपनी साइट पे डाला है. जिसका साधारण जन की तरह अवलोकन करने पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा है की विकास के गति में तेजी आयेगी। भारत में पहले से ही मजबूत पालिसी है लेकिन कमजोर इम्प्लीमेंट कराना .सबसे बड़ी बीमारी है इससे हम पार पा गए तो यकीन मानिए सोने की चिड़िया वाला वही सुनहरा हिंदुस्तान एक बार फिर हम सबकी नजरों के सामने होगा. पर क्या ऐसा हो पाएगा? क्या आप ऐसा कर पाएंगे? जी हां, हम आप से पूछ रहे हैं. क्योंकि सिर्फ शिलान्यास करा देने से