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People as Partners: Suggestions invited for the Budget

People as Partners: Suggestions invited for the Budget
Start Date :
Sep 21, 2015
Last Date :
Feb 06, 2016
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
Submission Closed

To foster the spirit of 'Jan Bhagidari' and to infuse more transparency into the budget making exercise, thereby having people as partners in the process of budget making, the ...

To foster the spirit of 'Jan Bhagidari' and to infuse more transparency into the budget making exercise, thereby having people as partners in the process of budget making, the Union Ministry of Finance has decided to invite suggestions for Union Budget 2016-17.

Citizens are requested to submit their ideas and suggestions on the topics that are generally in the ambit of Budget proposals as presented in the Parliament each year.

Suggestions may be submitted either directly in the comments box or through attached PDF documents.

The last date for submissions of suggestions is 5th February 2016.

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Showing 6633 Submission(s)
Vipin Kumar
Vipin Kumar 10 years 6 months ago
MANNIYA P M JI APSE ANURODH HAI KI AB AAP BHARAT ME RAH KAR BHI BAGI NETA / JANTA PER DHYAN DENE KI JAROORAT HAI,APNE JO VIDESH MAIN JAKAR BHARAT KI RANKING BANAI HAI, USKO MAINTAIN KARNE PER BHI DHYAN DE,SHRI RAHUL GANDHI JAISI NETAJI BHARAT KA NASH KARNE PER UTARU HAI,
Logesh R
Logesh R 10 years 6 months ago
Review provisions and aids to startups that are non performing and making huge losses please put in a system that would ensure proper and moderate use of shareholders money by startups and provide guidelines for investments on expansion of services and salaries to top managements based on profits incurred in the financial year. Considering Flipkart that reports losses in hundreds of crores and now in thousands of crores could offer its employees pay in crores. Please address the issue.
OM PARKASH SINGHAL
OM PARKASH SINGHAL 10 years 6 months ago
पेट्रोल पम्पों पर स्वीकार किये जाने वाले सभी डेबिट व क्रेडिट कार्डों को पेट्रोल पम्पों पर प्रयोग करने पर बैंकों द्वारा मन मर्जी से फ्यूल सरचार्ज काट जा रहा है। जिससे बचने के लिए ग्राहकों को नगद भुगतान पर तेल लेना पड़ता है। जिसके बारे में माननीय वित्त मंत्री जी को ध्यान देने की आवश्यकता है। #budget, #union Budget
OM PARKASH SINGHAL
OM PARKASH SINGHAL 10 years 6 months ago
पेट्रोल पम्पों पर स्वीकार किये जाने वाले सभी डेबिट व क्रेडिट कार्डों को पेट्रोल पम्पों पर प्रयोग करने पर बैंकों द्वारा मन मर्जी से फ्यूल सरचार्ज काट जा रहा है। जिससे बचने के लिए ग्राहकों को नगद भुगतान पर तेल लेना पड़ता है। जिसके बारे में माननीय वित्त मंत्री जी को ध्यान देने की आवश्यकता है।
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
तालाब निर्माण एवं जल संवर्धन:-सिंचित क्षेत्र के रकबे को बढ़ाने के लिए प्रत्येक दस से पंद्रह गांवों के समूह में एक बड़े तालाब का निर्माण किया जा सकता है जिसका उपयोग सिंचाई के साथ-साथ मत्स्य/झींगा पालन तथा पर्यटन के लिए किया जा सकेगा.इस प्रकार के बड़े तालाब से सम्पूर्ण कृषि क्षेत्र को सिंचित कमान में लाया जा सकेगा और क्षेत्र में दो या अधिक फसलें ली जा सकेंगी,जिससे उत्पादन में भी उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकेगी.सिंचाई व्यवस्था गुरुत्व आधारित नालियों से होने के कारण बिजली आवश्यकता भी न्यूनतम रहेगी।
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
सहकारी कृषि:-जनसँख्या बढ़ने के साथ-साथ कृषि जोतों का आकार घटता जा रहा है.खेतों के इतने छोटे-छोटे हिस्से हो गए है कि उनसे अधिक उत्पादन की संभावना नहीं रह गयी है.छोटे किसानों के पास तो पर्याप्त संसाधनों की कमी ही रहती है.आज बड़े-बड़े ओद्योगिक समूह भी कृषि क्षेत्र में प्रवेश कर रहे हैजिनके पास पर्याप्त संसाधन है.अतः इनसे मुकाबले के लिए सहकारी कृषि को अपनाया जा सकता है,इसके अंतर्गत छोटे-छोटे जोतो को मिलाकर वृहद कृषि क्षेत्रों की स्थापना की जा सकती है,जिनका नियंत्रण सहकारी किसान संघों के पास रहे।
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
ग्रामीण विशेष आर्थिक क्षेत्रों की स्थापना के द्वारा बेरोजगारी की समस्या से प्रभावशाली ढंग से निपट सकते है.इन उद्योगों के लिए कुशल/अर्धकुशल कारीगरों की आवश्यकता होगी जिसकी आपूर्ति शहरी क्षेत्रों से की जा सकेगी.अकुशल/अर्धकुशल श्रमिकों की आपूर्ति गांवों से ही की जा सकेगी.इस प्रकार के प्रयासों के दूरगामी परिणामों के रूप में शहरों की और होने वाले पलायन में उल्लेखनीय कमी आएगी और शहरों में झुग्गी बस्तियों और अपराधों में स्वतः ही कमी होने लगेगी.
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
दुग्ध संयंत्र,मुर्गी/बकरी पालन,मत्स्य पालन,डेरी उद्योग,फल/सब्जी प्रसंस्करण उद्योग,भंडारगृह आदि.इन उद्योगों से प्राप्त उत्पादों के विपणन एवं वितरण(मार्केटिंग/डिस्ट्रीब्युशन) के लिए निकटतम शहरों में विभिन्न स्थानों पर सहकारी विक्रय केन्द्रों की स्थापना की जा सकती है.इस प्रकार उत्पादक और उपभोक्ता के बीच से बिचोलियों की संख्या कम करके उचित मूल्य पर वस्तुएं उपलब्ध करवाई जा सकती है,साथ ही उत्पादक को भी अधिक लाभ प्राप्त हो सकेगा.
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
निजी-सार्वजानिक भागीदारी के द्वारा आरंभिक अंशपूंजी की व्यवस्था की जा सकती है.देश के लगभग प्रत्येक राज्य के सभी जिलों में किसानों व सामान्य जमाकर्ताओं की सहकारी समितियां पहले से ही कार्यरत है जो पूर्णतः सहकारिता पर आधारित है इनमें गाँव के मजदूरों एवं अन्य लोगों को भी प्रतिनिधित्व दिया जा सकता है. निजी-सार्वजनिक भागीदारी के द्वारा कई प्रकार के उद्योगों की स्थापना की जा सकती है जैसे:आटा/मैदा मिल,सोया उद्योग,आलू चिप्स.
Abhay Kumar Jonwal
Abhay Kumar Jonwal 10 years 6 months ago
१.ग्रामीण विशेष आर्थिक क्षेत्रों(R-SEZ) की स्थापना:देश के अलग-अलग क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की फसलें पैदा की जाती है,अतः इन क्षेत्रगत कृषि उत्पादों पर आधारित कई प्रकार के उद्योगों की स्थापना करके स्थानीय स्तर पर ही इन कृषि उत्पादों का मूल्य संवर्धन(वेल्यु एडिशन) किया जा सकता है.इसके लिए प्रत्येक दस से बीस गाँवो या अधिक के संकुल में एक विशेष आर्थिक केंद्र की स्थापना की जा सकती है,जहा पर अनेक प्रकार के उद्योगों की स्थापना की जा सकती है.इसके लिए निजी-सार्वजानिक भागीदारी के द्वारा आरंभिक अंशपूंजी