Adv Praveen Pratap
3 years 10 months ago
सर जी,
हृदय खुश तो सब खुश,यह देहाती कहावत है।
सर हमें तुष्टिकरण का त्याग करना होगा।
दावा को नहीं,किचिन को प्रसारित करना होगा।
शुद्ध भोजन और सार्थक भजन को प्रसारित करना होगा।
वह आयुर्वेद जो किचिन में बेकार पड़ा है,उसे प्रसारित होना चाहिए।
किसी भी इंसान को किसी प्रकार से भी(बात, पित्त, कफ) को कंट्रोल करना सीखना होगा।
और इसका एक माध्यम शिक्षा भी हो सकता है।
कम खाओ अच्छा खाओ सीखना होगा।
अच्छा खाना हमेशा सस्ता होता है और बुरा खाना हमेशा महंगा होता है।
यह प्रसारित व प्रचारित करना ही होगा।
करबद्ध प्रणाम
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