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दवाओं, आहार और चिकित्सा पद्धति का विनियमन

Regulation of Drugs, Food and Medical Practice
आरंभ करने की तिथि :
Jun 10, 2015
अंतिम तिथि :
Aug 11, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और ...

यह चर्चा विषय ‘भारत में स्वास्थ्य प्रणालियां:मौजूदा निष्पादन और संभाव्यता के बीच की दूरी को कम करना’ शीर्षक से हमारी पहली चर्चा के सन्दर्भ अवं जारी रखने के लिए हैं । पहले चर्चा में इस विषय पर टिप्पणी की है जो दूसरों की समीक्षा करने के लिए, हमारे ब्लॉग पर उपलब्ध हैं ।

कैसे हम दवाओं, आहार और चिकित्सा पद्धति का विनियमन को मजबूत बनाने के माध्यम से स्वास्थ्य लाभ को अधिकतम करें?

1. मुद्दे

1.1. दवाओं और नैदानिक जांच के लिए तर्कहीन नुसखा पद्धतियों के फलस्वरूप अति-उपयोग और अपव्यय होता है और दवा प्रतिरोध उत्पन्न होता है।

1.2. दवा कंपनियों के उत्साही विपणन और प्रोत्साहन कार्यकलापों की वजह से दवाओं के तर्कहीन उपयोग में बढ़ोतरी होती है।

1.3. दवा विनियमन के मामले में केन्द्र और राज्यों का समवर्ती क्षेत्राधिकार है जिसके फलस्वरूप जवाबदेही कम हो जाती है।

1.4. जनता और विशेषकर बच्चों के बीच अस्वास्थ्यकर खाद्य पदार्थों की बिक्री और उपभोग को नियंत्रित करने के लिए कोई विनियम नहीं हैं।

1.5. ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी को दूर करने के लिए विनियमों की कमी है।

1.6. देखभाल के मानकों को अपनाए न जाने की वजह से और राज्यों द्वारा नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम (सीईए) को सीमित रूप से अपनाए जाने के कारण नैदानिक देखभाल में तर्कहीन पद्धतियां अभी भी जारी हैं।

2. सुझाव

2.1. तर्कसंगत नुसखा पद्धतियों को बढ़ावा देने के लिए मानक उपचार दिशानिर्देशों को पूरा किया जाना चाहिए, इनका व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाना चाहिए, इन्हें अधिदेशित किया जाना चाहिए और इनका अनुसरण किया जाना चाहिए।

2.2. दवाओं विशेषकर एन्टीबायोटिक्स की बिक्री और नुसखे से संबंधित दिशानिर्देशों को कारगर रूप से लागू किया जाना चाहिए।

2.3. दवा कंपनियों द्वारा अनैतिक प्रोत्साहन की पहचान करने और दंडित करने हेतु एक अनिवार्य संहिता तैयार करने की आवश्यकता है। इसमें दवा कंपनियों द्वारा अनुसंधान, व्याख्यानों, परामर्श, यात्रा और मनोरंजन के लिए डॉक्टरों को किए गए भुगतानों, जिससे हितों का टकराव उत्पन्न हो सकता है, का खुलासा करने की अपेक्षा वाला कानून भी शामिल है।

2.4. दवा विनियमन की प्रणालियों का सुधार करने की जरूरत है क्योंकि यह मामला केन्द्र और राज्यों, दोनों के क्षेत्राधिकार में आता है।

2.5. विशेष रूप से स्कूली बच्चों के बीच अस्वास्थ्यकर खाद्य सामग्री की बिक्री और उपभोग को रोकने के लिए उचित विनियमन होना चाहिए।

2.6. मेडीकल स्नातकों द्वारा अनिवार्य ग्रामीण सेवा सुनिश्चित करने के लिए उचित विनियामक तंत्र होना चाहिए।

2.7. सरकारी डॉक्टरों द्वारा निजी प्रैक्टिस की वजह से उत्पन्न होने वाले हितों के टकराव का उचित विनियम के माध्यम से समाधान किया जाना चाहिए।

2.8. नैदानिक प्रतिष्ठान अधिनियम, जिसमें पंजीकरण, देखभाल के मानक, रोगी अधिकार और शिकायत निपटान तंत्र शामिल हैं, के अंगीकरण और कार्यान्वयन को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। इन विनियामक उपायों को सुनिश्चित करने से संबंधित उपबंधों को राज्यों द्वारा केन्द्र के साथ हस्ताक्षरित एमओयू में उपयुक्त रूप से शामिल किया जा सकता है।

2.9. व्यावसायिक परिषदों और मेडीकल कॉलेजों के संकाय द्वारा नुसखों की जांच की जा सकती है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि नैदानिक निर्णय लेने की प्रक्रिया, देखभाल के साक्ष्य आधारित नयाचारों के अनुरूप हो जिससे रोगियों को तर्कहीन पद्धतियों से बचाया जा सकेगा।

फिर से कायम कर देना
131 सबमिशन दिखा रहा है
Preetha P S
Preetha P S 10 साल 10 महीने पहले
Patients with cancer, diabetes or other deadly diseases are their first target. Some are administering variety medicines to the patients without analysing the disease. So make provisions to analyse the prescription of these doctors if you can. Along with adulteration practicing pharmacokinetics by the doctors for monetary benefit is also a menace to the society
Preetha P S
Preetha P S 10 साल 10 महीने पहले
Doctors are paying a lot by these companies. Make a list of Doctors present their research papers in International journals or International seminars. All the expenses were meet by these companies. If you go through the research papers or international journeys of the doctors or the doctors with collaborative research with multinational companies it will be clear. Then go through their financial background and the details of the patients to clarify it.
Preetha P S
Preetha P S 10 साल 10 महीने पहले
Modiji,Another important thing that I noticed was doctors are working as agents for practicing pharmacokinetics of various drug.These multinational companies are doing their drug trials in common man especially in poor people. They make their trials even in small children. A number of doctors working in govt. as well as reputed private hospitals are doing collaborative research with multinational companies & trials of their vaccines are carried out in people esp. in poor.
Chanchal MAl Chordia
Chanchal MAl Chordia 10 साल 10 महीने पहले
By neglecting Supporting Diseases, Diagnosis can not be correct and the Treatment based on such Diagnosis may give only Relief with Adverse Effect so what ever medicines is given to any Patient must be based on individual requirement because no two patients are exactly identical.
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