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नया ज्ञान

New Knowledge
आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

हम एक गतिशील ज्ञान आधारित समाज में रह रहे हैं। नई प्रौद्योगिकीयां और ...

हम एक गतिशील ज्ञान आधारित समाज में रह रहे हैं। नई प्रौद्योगिकीयां और चुनौतियां अध्ययन के नये क्षेत्रों को जन्म देती हुई दिखाई दे रही हैं। हमारे उच्चतर शिक्षा संस्थानों को वैश्विक परिदृश्य में ज्ञान के नये क्षेत्रों की पहचान करनी चाहिए और इस आवश्यकता को पूरा करने के लिए अपनी क्षमताओं का निर्माण करना चाहिए। हम वैश्विक राष्ट्रमंडल में अपनी शिथिल क्षमता को कैसे बनाकर रख सकते हैं।

फिर से कायम कर देना
3120 सबमिशन दिखा रहा है
NAGZARI HINGOLI
NAGZARI HINGOLI 10 साल 8 महीने पहले
नवीन ज्ञान हा कोणत्याही घटकाचा आत्मा असतो नवीन ज्ञान शिक्षण हे बदलत्या काळानुसार दिले गेले पाहिजे शिक्षकांना इतर अवांतर कामे देऊ नये शिक्षक हा समाज घडवण्यासाठी अहोरात आपले सर्वस्व प्राण अर्पण करत असतो
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mh.nnr.182378 10 साल 8 महीने पहले
शालेय व्यवस्थान त्या-त्या परिसरातीच्या भौगोलिक पारिस्थिति नुसार भौगोलिक घटकांचा विचार करून शालेय व्यवस्थान असावे इयत्ता १ ली ते २ री पर्यंत जास्तीत जास्त भाषा विषय शिकविण्यात्त यावे,शिक्षकांना शिकवण्या व्यतिरिक्त इतर कामे देवू नये,जैसे की जनगणना,इतर सर्वेचे कामे ही ग्रामपंचायतीना द्यावीत,विद्यार्थी शायेत गैरहजर राहात असल्यास त्या विद्याथ्यार्रच्या पालक ही जबाबदार असावा अर्थात पालक, शिक्षक व समाज या सर्व घटकांनी एकत्र येऊन विद्यार्थ्यांच्या विकासच्या दृष्टिने प्रयत्न केले पाहिजेत.
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hm zpups hardoli raja
hm zpups hardoli raja 10 साल 8 महीने पहले
kisi bhi niti ko lagu karne se pehle yadi is tarah ki charcha aayojit ki jaye jahan par sabse nichle ghatak bhi samavisht ho apna mat pradarshit kar payen toh ise ek stutya pahal manta hoon sarkar ka dhanyawaad aaj bhi dehaton ki pathshalaon mein unnat tantragyan ka upyog bahut hi simit hai ya nahin ke barabar hai is vishay mein yadi niti aayog kuchh pravdhan kar payen toh woh abhinandaniy kadam hoga