Home | MyGov

Accessibility
ऐक्सेसिबिलिटी टूल
कलर एडजस्टमेंट
टेक्स्ट साइज़
नेविगेशन एडजस्टमेंट

प्रधानमंत्री द्वारा रेडियो के माध्यम से लोगों को किये गए संबोधन के बारे में अपने विचार दें

Inputs for Prime Minister’s Radio Address
आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Dec 12, 2014
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

आपने उन्हें टेलीविज़न पर देखा होगा, उनके भाषणों को इंटरनेट पर सुना ...

आपने उन्हें टेलीविज़न पर देखा होगा, उनके भाषणों को इंटरनेट पर सुना होगा, उनके ऐतिहासिक रैलियों में गये होंगे, सोशल मीडिया पर उनका अनुसरण किया होगा। अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपसे रेडियो के माध्यम से जुड़ेंगे!
प्रधानमंत्री कश्मीर से कन्याकुमारी तक, महाराष्ट्र से मणिपुर तक भारत के लोगों के साथ बातचीत करेंगे।
प्रधानमंत्री चाहते हैं कि आप उनके रेडियो के माध्यम से संबोधन की प्रकृति एवं संरचना की रूपरेखा बताएं। वे अपने संबोधन से संबंधित निम्नलिखित पहलुओं पर आपकी राय चाहते हैं:
संबोधन का अंतराल -
(प्रधानमंत्री किस अंतराल पर लोगों को संबोधित करें – महीने में एक बार, दो महीने में एक बार, तीन महीने में एक बार? क्या इसके लिए कोई निश्चित दिन होना चाहिए: जैसे – महीने के दूसरे एवं चौथे रविवार को निश्चित समय पूर्वाह्न 11 बजे पर)
संबोधन की प्रकृति एवं विषयवस्तु –
(इस संबोधन में क्या-क्या बातें होनी चाहिए – क्या यह देश को किया गया एक आम संबोधन होना चाहिए या इसके अंतर्गत कुछ विशेष पहलुओं, जैसे – सुशासन, महिला सशक्तिकरण, रक्षा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता इत्यादि को सम्मिलित किया जाना चाहिए?)
संबोधन की संरचना –
(संबोधन की संरचना क्या होनी चाहिए? )
इस संबोधन का नाम –
(इन संबोधनों की श्रृंखला के लिए एक नाम अथवा शीर्षक का सुझाव दें। यह नाम अथवा शीर्षक सर्जनात्मक होना चाहिए एवं जो इस तरह के कार्यक्रम का सही अर्थ लोगों में संप्रेषित कर सके)

अतः अपने विचारों को साझा करें एवं भारत और भारत की एकता को प्रदर्शित करने वाले एक और उल्लेखनीय कदम का हिस्सा बनें।

फिर से कायम कर देना
4817 सबमिशन दिखा रहा है
RAMESHAN BAVUKKAD
RAMESHAN BAVUKKAD 11 साल 8 महीने पहले
Sir, An initiative is required to end Mao wadi terrorism in India. Some scheme is required to take care of the poorest people in these areas by providing a shelter to them and Loans by State govt to earn their livelihood by purchasing Cow/Goat etc. Govt may even ask the corporate Builders to shoulder the responsibility to build and a fund can be accumulated even from working class for eradicating this issue from our country. public will start supporting the govt and the terrorism will end soon.
Saurabh Seth
Saurabh Seth 11 साल 8 महीने पहले
Healthy India #ESI #Subsidy Dear Prime Minister we have a wonderful Insurance scheme ESI, why can't we make it universal ? Improve the standard at hospitals and make ESI compulsory for employers? ESI requires us to fill number of work days, why can't that data be used to link subsidy. Subsidies are important but why should it be given to people who just want to sit at home & do nothing?
Anmol Ratan shukla
Anmol Ratan shukla 11 साल 8 महीने पहले
मान्यवर, निवेदन हैँ कि प्रार्थी अनमोल रत्न शुक्ला द्वारा वर्ष 2012 मेँ पं.रामकिशोर शुक्ला शा. कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय ब्यौहारी अन्तर्गत बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर रोल नं. 105711 भूगोल विषय का द्वितीय प्रश्नपत्र दिनाँक 31/05/2012 को नियमित परीक्षार्थी के रूप मेँ परीक्षा दी गई थी, तत्सम्बन्ध मेँ परीक्षार्थी द्वारा विधिवत सभी प्रश्न उत्तरपुस्तिका मेँ हल करते हुये दो पूरक उत्तरपुस्तिका भी ली गई थी जबकि परिणाम आने पर प्रार्थी को उक्त विषय मेँ शून्य अंक दिये गये, इस स्थिति मेँ प्रार्थी द्वारा आर.टी.आई के माध्यम से उत्तरपुस्तिका निकलवाई गई जिसमेँ कवर पेज के अतिरिक्त खाली पन्ने कोरी कापी स्टेपल किये हुये दिये गये. उक्त प्रकरण से सम्बधिँत विचारणीय तथ्य निम्नानुसार हैँ:- 1- परीक्षाकक्ष मेँ परीक्षार्थी को मिली मूलकापी सिली हुई थी, जबकि आर.टी.आई से प्राप्त कापी का ऊपर का कवरपेज छोँड़कर शेष सिलाई तोड़ते हुये कोरी कापी टैग की प्राप्त हुई. 2- परीक्षार्थी द्वारा परीक्षा भवन मेँ दो (02) लूज कापी (पूरक उत्तरपुस्तिका) ली गयी थी मूलकापी के पृष्ठ भाग मेँ दिये गये निर्देश मेँ इस आशय का स्पष्ट उल्लेख रहता हैँ कि मूल कापी भरने के बाद ही लूज कापी दी जावेगी, जिसका निर्धारण सम्बन्धित कक्ष के परीक्षक कापी देखकर करते है एवं पूरक उत्तरपुस्तिका की संख्या दर्ज करते हुये परीक्षार्थी को दी जाती हैँ. इस स्थिति मेँ आर.टी.आई से प्राप्त कोरी कापी, कापी बदले जाने का रहस्य उजागर होता हैँ.. 3-परीक्षार्थी द्वारा 02 पूरक उत्तरपुस्तिका लिये जाने की पुष्टि महाविद्यालय से प्राप्त उत्तरपुस्तिका के वीक्षकीय विवरण के अनुसार एवं प्राचार्य एवं परीक्षा अधीक्षक द्वारा लिखित मेँ भूगोल द्वितीय प्रश्नपत्र के अनुक्रमाँक 105711 द्वारा पूरक उत्तरपुस्तिका लिया जाना स्वीकार किया हैँ, जो आर.टी.आई से प्राप्त कापी एवं जानकारी के आधार पर कापी बदले जाने की पुष्टि करता हैँ. महोदय, उक्त महाविद्यालय मेँ प्रतिवर्ष सभी परीक्षाओँ मेँ अच्छे विद्यार्थीयोँ की उत्तरपुस्तिका को बदलकर फेल विद्यार्थीयोँ से लम्बी रकम लेकर अच्छे अंकोँ से उत्तीर्ण करने का व्यवसाय काफी दिनोँ से प्रचलन मेँ हैँ, जिसमेँ प्रतिवर्ष सैकड़ो विद्यार्थीयोँ के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जाता हैँ प्रार्थी की पूर्व मेँ भी कापी बदलते हुये शून्य अंक दिये गये थे, प्रार्थी के अतिरिक्त उक्त महाविद्यालय मेँ इसी तारतम्य मेँ बी.ए. चतुर्थ सेमेस्टर समाजशास्त्र के प्रथमपत्र मेँ रोल नं. 091089 एवं 091013 की भी उत्तरपुस्तिका बदली गयी थी..अस्तु श्रीमान से विनम्र निवेदन हैँ कि महाविद्यालय ब्यौहारी अन्तर्गत परीक्षा की कापी बदले जाने के संबध मेँ तथा जिन विद्वानगणोँ के द्वारा यह कृत्य किया गया हैँ सूक्ष्म से सूक्ष्म जाँचकर सही अपराधी को दण्ड़ित कर मुझ प्रार्थी को न्याय दिलाये जाने की कृपा की जायेँ..