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राष्ट्रीय नवाचार और उद्यमिता संवर्धन नीति (एनआईईपीपी)

राष्ट्रीय नवाचार और उद्यमिता संवर्धन नीति (एनआईईपीपी)
आरंभ करने की तिथि :
Apr 19, 2022
अंतिम तिथि :
Apr 30, 2022
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

21वीं सदी की शिक्षा प्रणाली को पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में सुधार ...

21वीं सदी की शिक्षा प्रणाली को पारंपरिक शिक्षा प्रणाली में सुधार करते हुए नवाचार को बढ़ावा देना चाहिए। पाठ्यक्रम में गुणवत्ता सुधार की आवश्यकता और छात्रों को 21वीं सदी के अनुकूल दक्षताओं से लैस करने के मद्देनजर शिक्षा प्रणाली के मूल स्वरूप में नवाचार लाया गया है। जिसके लिए, नवाचार को बढ़ावा देने वाली स्कूली संस्कृति का व्यापक रूप से प्रोत्साहन दिए जाने की आवश्यकता है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में शैक्षिक प्रणाली में सुधार के लिए नवाचार पर विशेष ध्यान दिया गया है।

जिसके मद्देनजर, सीबीएसई ने शिक्षा मंत्रालय के इनोवेशन सेल के साथ मिलकर स्कूलों में 'नेशनल इनोवेशन एंड एंटरप्रेन्योरशिप प्रमोशन पॉलिसी (एनआईईपीपी)' शीर्षक से छात्रों में नवाचार और उद्यमिता कौशल को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न दिशा निर्देश जारी किए हैं। यह नीति स्कूली शिक्षा प्रणाली में विभिन्न उपायों के माध्यम से मार्गदर्शन करती है, जिन्हें सीखने के वातावरण को बढ़ावा देने की दिशा में अपनाया जा सकता है, जहां छात्रों की रचनात्मकता, विचार, नवाचार, समस्या समाधान और उद्यमिता कौशल को प्रोत्साहन दिया जाता है, चाहे उनकी उम्र कुछ भी हो।

पॉलिसी के बारे में अधिक जानने के लिए यहाँ क्लिक करें(PDF-341KB)


नागरिक नीचे दिए गए सवालों के जवाब नीचे कमेंट सेक्शन में पीडीएफ फॉर्मेट में दे सकते हैं-

1) इस नीति पर आपकी क्या राय है? अपनी बात का समर्थन करने के लिए सभी आवश्यक डेटा और प्रासंगिक सामग्री के लिंक शामिल करें।
2) स्कूलों में लागू करने के लिए आप इस नीति की कितनी मंजबूती से अनुशंसा करेंगे? यदि उपलब्ध हो तो डेटा दें।
3) कोई अतिरिक्त प्वाइंट, जिसे आप नीति में शामिल करना चाहते हैं? यदि उपलब्ध हो, तो डेटा शामिल करें.
4) इस दस्तावेज़ को समझने में अगर कोई दिक्कत हो तो आप अपनी वैकल्पिक भाषा में इसे देख सकते हैं? उस प्वाइंट को स्पष्ट करें तथा अपने सुझाव वैकल्पिक भाषा में बताएं
5) इसे लागू करने में आपके समक्ष क्या समस्याएं आ रही हैं? स्पष्ट रूप से पहचान कर उस समस्या का वर्णन करें।

या

इस लिंक के माध्यम से सभी देशवासी अपने विचार इस नीति पर साझा कर सकते है:- https://forms.gle/QtbDY3WKcEbu4D1m6

सुझाव साझा करने की अंतिम तिथि 30 अप्रैल 2022 है।

फिर से कायम कर देना
385 सबमिशन दिखा रहा है
kuldeep mohan trivedi
kuldeep mohan trivedi 4 साल 5 महीने पहले
नई शिक्षा नीति में सबसे पहले बच्चो को पढ़ना लिखना आना चाहिए।जिससे बच्चे हर कक्षा में निर्भय होकर पढ़े और किसी भी परीक्षा में निडर होकर भाग ले।उनमें तकनीकी शिक्षा के प्रति जागरूकता पैदा करने के लिये मातृभाषा में पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए।बीच में ही बच्चे पढ़ाई छोड़ देते है।जिससे बच्चो में शिक्षा का स्तर गिर जाता है।वे मजदूर बनकर डेज़ह और विदेश में काम करते है।हमारी शिक्षा व्यवस्था ऐसी हो।जो बच्चो में उत्साह पैदा करे।उनमें शिक्षा के प्रति अरुचि उत्पन्न न हो।
lakshminarayanan
lakshminarayanan 4 साल 5 महीने पहले
Dear sir, our education system from schooling to college, is creating STUDENT ROBOTS to work in office , companies and factories at 95 % of total student pass out, this method of creating ROBOTS is due memorizing and vomiting in exam papers... this method should be stopped... system should be designed to improve intellectual quotient( IQ ) and Emotional quotient (EQ) as both parameter are necessary for entrepreneurship
pramod kumar patel
pramod kumar patel 4 साल 5 महीने पहले
हमारे लिए जिस माध्यम से पड़े हैं उसी में सारा काम भी होना चाहिए जैसे कि हम हिंदी माध्यम से हैं तो हिंदी में ही सब कुछ कार्य होना चाहिए हमारे लिए इंग्लिश की इतनी आवश्यकता नहीं है इंग्लिश उनको ही केवल पढ़ाने चाहिए जो बाहर विदेश जाने के लिए हमारी पाठ्यक्रम में 3 भाषाएं हैं हिंदी भी इंग्लिश और संस्कृति इनमें से कोई दो भाषाएं पुरानी चाहिए हिंदी मीडियम से 12वीं तक पढ़ाई की उसके बाद ग्रेजुएशन में इंग्लिश इंग्लिश के कारण हिंदी और इंग्लिश मैं अधिक कठिनाई होती है
pramod kumar patel
pramod kumar patel 4 साल 5 महीने पहले
हमारे लिए कक्षा 8 बी से ही पाठ्यक्रम विषय वार होना चाहिए जिसमें हम 12वीं तक यह पढ़ने में और प्रयोग करने में हर तरह के प्रयोग करानी चाहिए जिससे कि हमारा भविष्य बन सके और हमारे लिए कंपनियों में उसी सब्जेक्ट से भी छोटे-छोटे होनर सीखना चाहिए और 12वीं के बाद कंपनियों में ट्रेनिंग पूरी चार ट्रेनिंग होने के बाद हम हमारे लिए नौकरी का और टैलेंट का और बिजनेस का आईडिया होना चाहिए हमारे लिए ग्रेजुएशन हम अपने पैरों पर खड़े होकर ताकि हमारे लिए पैसों की और समय की कीमत समझ होनी चाहिए हम जिंदगी भर नौकरी नहीं ढूं
Chandra B Tiwari
Chandra B Tiwari 4 साल 5 महीने पहले
उद्यमिता शब्द बहुत पुराना है हमारे सबसे पहले उद्यमी किसान है हमें अपनी शिक्षा पद्धति में सही में रोल मॉडल्स बताने होंगे हमारी शिक्षा पद्धति गुलामी मानसिकता की तरफ जाती है जबकि उद्यमिता आर्थिक आजादी को बताती है मगर हमारी शिक्षा पद्धति में ज्यादा नंबर लाओ और अच्छी नौकरी ढूंढो कोई यह नहीं कहता की बड़ा व्यापार खड़ा करो जो हजारों लोगों को नौकरी दें क्योंकि जो हमारे शिक्षक या अध्यापक हैं वह भी तनख्वाह के लिए काम करते हैं उन्हें खुद उद्यमिता का नहीं पता वह है विद्यार्थी को उद्यमिता कैसे सिखाएंगे सही शि