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राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 से संबंधित मसौदे के लिए सुझाव दें

Give suggestions on National Health Policy 2015 Draft
आरंभ करने की तिथि :
Feb 01, 2015
अंतिम तिथि :
Feb 11, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति - एनएचपी 2015 का मसौदा तैयार कर लिया गया है और ...

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति - एनएचपी 2015 का मसौदा तैयार कर लिया गया है और पणधारकों के परामर्श हेतु सार्वजनिक डोमेन में रख दिया गया है। नीति के संबंध में सुझाव/टिप्पवणियां/प्रतिक्रिया आमंत्रित की गई हैं जिसमें अन्य् बातों के साथ-साथ निम्नेलिखित व्या पक क्षेत्र शामिल है: लक्ष्यह, सिद्धांत, उद्देश्यद, नीतिगत निर्णय, निवेश, निवारक और संवर्द्धक स्वास्थ्य, सार्वजनिक स्वास्थ्य देखभाल प्रदानगी, स्वास्थ्य के लिए मानव संसाधन, स्वास्थ्य देखभाल का वित्तलपोषण और निजी क्षेत्र को शामिल करना, विनियामक ढ़ाचा, चिकित्साा प्रौद्योगिकियां, स्वास्थ्य और स्वास्थ्य सूचना जरूरतों के लिए आईसीटी, स्वास्थ्य के लिए जानकारी, गवर्नेंस, स्वास्थ्य देखभाल के लिए विधिक ढ़ाचा और सूचना का अधिकार।

आप अपनी टिप्पणियां 10 फ़रवरी 2015 तक भेज सकते हैं।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2015 से संबंधित मसौदे के बारे में अधिक जानकारी यहाँ से प्राप्त करें: http://cdn.mygov.nic.in/bundles/frontendgeneral/pdf/draft-national-healt...

फिर से कायम कर देना
1694 सबमिशन दिखा रहा है
Walmik More
Walmik More 11 साल 4 महीने पहले
सर मैं आपको विनंती करता हुं कि कुछ सक्त कदम उठाकर पुरे देश मे चल रही बियर बार, देशी दारू कि दुकाने, आदि नशीली पदार्थोकी कम्पनीया इन सबको कही और नोकरी या अच्छा बिझनेस करने कि अंतिम सूचना देकर एक साल के अंदर बंद कर देना चाहिये. जीससे हमारा हिंदुस्तान प्रगती कि और कदम बढायेगा।
Walmik More
Walmik More 11 साल 4 महीने पहले
आदरणीय पंतप्रधान नरेंद्र मोदीजी. . हमारा भारत सबसे तरुण देश कहा जाता है, पर हमारे देश के बहुतसारे नौजवान सराब,गुटखा, सिगारेट जैसी चीजो के अधीन हो चुके है। जिस नौजवान को अपने देश कि और अपने बुढे मां-बाप कि सेवा करनी चाहिये इसी शराबी बेटे को मां-बाप पाल-पोष रही है। ऐसे नौजवानोसे कितने बेटीयोंके संसार/घर बिखरे हुए है। इसकी वजह से देश अंदरसे कमजोर होता जा राहा है. हम स्वास्थ के लिये करोडे रुपये खर्च करते है पर बिमारी न हो इसलिये उतना खर्च नही करते कि जितना कि करना चाहिये.