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22 फ़रवरी 2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित मन की बात कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव भेजें

22 फ़रवरी  2026 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा आयोजित मन की बात कार्यक्रम के लिए अपने सुझाव भेजें
आरंभ करने की तिथि :
Feb 03, 2026
अंतिम तिथि :
Feb 20, 2026
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और ...

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और मुद्दों पर अपने विचार साझा करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री, आपको मन की बात के 131 वें एपिसोड में संबोधित किए जाने वाले विषयों पर अपने सुझाव साझा करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

मन की बात के आने वाले एपिसोड में जिन विषयों या समस्याओं पर आप चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी बात करें, उनके बारे में हमें अपने सुझाव भेजें। इस खुले मंच में अपने विचार साझा करें या आप वैकल्पिक रूप से टोल-फ़्री नंबर भी डायल कर सकते हैं 1800-11-7800 और प्रधानमंत्री के लिए अपना संदेश हिंदी या अंग्रेजी में रिकॉर्ड करें। रिकॉर्ड किए गए कुछ संदेश प्रसारण का हिस्सा बन सकते हैं।

आप 1922 पर एक मिस्ड कॉल भी दे सकते हैं और SMS में मिले लिंक को फ़ॉलो करके सीधे प्रधानमंत्री जी को अपने सुझाव दे सकते हैं।

और 22 फ़रवरी 2026 को सुबह 11:00 बजे मन की बात सुनना न भूलें।

फिर से कायम कर देना
2559 सबमिशन दिखा रहा है
Sarvesh Sharma
Sarvesh Sharma 7 महीने 1 week पहले
*आदरणीय मोदी जी,* मैं आपके समक्ष एक महत्वपूर्ण विषय पर अपनी बात रखना चाहता हूँ। आज के समय में शिक्षा का महत्व किसी से छुपा नहीं है, और यह हमारे देश के युवाओं के विकास में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लेकिन, हमारे समाज में कई ऐसे परिवार हैं जिनके पास अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती है। ऐसे में, अध्ययन स्थल की स्थापना एक महत्वपूर्ण कदम हो सकता है जो न केवल शिक्षा और कौशल विकास का केंद्र होगा, बल्कि युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में भी सहायक होगा। *अध्ययन स्थल की आवश्यकता* हमारे देश में कई ऐसे घर हैं जहां एक ही कमरे में पूरा परिवार रहता है। ऐसे में, बच्चों को पढ़ने के लिए जगह नहीं मिल पाती है। यह समस्या न केवल बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करती है, बल्कि उनके भविष्य को भी खतरे में डाल देती है। अध्ययन स्थल की स्थापना से इस समस्या का समाधान हो सकता है। यह स्थल बच्चों को एक शांत और अनुकूल वातावरण प्रदान करेगा जहां वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सकें।
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Samridhdhi
Samridhdhi 7 महीने 1 week पहले
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी 🙏 आप पिछले 10 सालों से ज्यादा समय से प्रधान सेवक हैं,,, क्यों नहीं रेपिस्टों को फांसी और भ्रष्टाचारी को को जेल और घुसपैठियों और उनके समर्थन वालों की नागरिकता रद्द कर रहे हैं इन सबमें आपका भय क्यों समाप्त होता जा रहा है क्या आप कमजोर हो रहे हैं या आपको भी स्वयं भारत रत्न प्राप्त करने की लालसा हो रहा है
ARUN KUMAR GUPTA
ARUN KUMAR GUPTA 7 महीने 1 week पहले
As per views expressed by Mr Vinod Khosla, IT and BPO jobs will disappear in about 5 years. This is certainly not a good NEWS for over 6 million employees in IT and BPO sector in India. It is difficult to genenerate quality jobs for freshers. With experienced persons looking for survival, the job market will get further complicated. Government can push policy reforms and availability of finances to Industry for ease in doing business start ups. However, to make such a large work force reemployable have to be worked out by Industry itself. It is traumatic for the person and family as someone earning good and living a decent life suddenly comes down to earth with a gloomy and uncertain future. There is no provision of social security in our country. Government shall consider to allow the persons affected by layoffs to club previous two years income tax returns with the period of unemployment of the person to get some tax relief or possible refunds to give some relief in short term
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MohitKhandal
MohitKhandal 7 महीने 1 week पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, आगामी राजस्थान पंचायत चुनावों के संदर्भ में निवेदन है कि कृपया मन की बात में इनके महत्व पर प्रकाश डालें। पंचायतें ग्रामीण लोकतंत्र की रीढ़ हैं और पेयजल, सीवरेज, शिक्षा, स्वास्थ्य, आधुनिक कृषि तकनीक, कुटीर उद्योग तथा कौशल विकास जैसे कार्यों की जिम्मेदारी निभाती हैं। यदि युवाओं और महिलाओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया जाए तो वे ग्रामीण विकास में अहम योगदान देंगे। ग्रामीण मतदाताओं को ईमानदार, शिक्षित और समर्पित उम्मीदवारों को चुनने के लिए प्रेरित करना विकसित राजस्थान और विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करेगा| सादर मोहित खाण्डल
AyushiDhurwe
AyushiDhurwe 7 महीने 1 week पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। ‘मन की बात’ कार्यक्रम हेतु सुझाव। महोदय, मेरा विनम्र निवेदन है कि आप ‘मन की बात’ कार्यक्रम में युवा सशक्तिकरण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा एवं पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर अपने विचार प्रस्तुत करें। इन विषयों पर आपका मार्गदर्शन देश के युवाओं और नागरिकों को जागरूक एवं प्रेरित करेगा। आशा है कि आप इस सुझाव पर विचार करेंगे। धन्यवाद। भवदीया, (आयुषी धुर्वे) छात्रा
Ayushi Raushan
Ayushi Raushan 7 महीने 1 week पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, नमस्कार। मैं एक छात्रा हूँ और आपसे निवेदन करना चाहती हूँ कि “मन्न की बात” में विद्यार्थियों के मानसिक स्वास्थ्य, प्रतियोगी परीक्षाओं के तनाव और करियर मार्गदर्शन जैसे विषयों पर विशेष चर्चा करें। आज कई छात्र मेहनत करने के बावजूद असफलता से टूट जाते हैं। यदि आप उन्हें प्रेरणा, धैर्य और सही दिशा के बारे में मार्गदर्शन देंगे तो लाखों युवाओं को नई ऊर्जा मिलेगी। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के अवसर बढ़ाने पर भी चर्चा होनी चाहिए ताकि हर छात्र अपने सपनों को पूरा कर सके। धन्यवाद। जय हिंद।
Anubhav Shukla
Anubhav Shukla 7 महीने 1 week पहले
मैं पवित्र संपूर्ण तन मन अवध भूमि से आता हूं यहां श्री राम जी का जन्म हुआ था मैं हिंदुस्तान में रहता हूं मैं हिंदुस्तानी हूं मेरे धर्म हिंदू मेरा धर्म सनातन है महेंद्र श्री राम जी का पूजा करता हूं जय श्रीराम
Anubhav Shukla
Anubhav Shukla 7 महीने 1 week पहले
मैं पवित्र संपूर्ण तन मन अवध भूमि से आता हूं जहां पर श्री कृष्ण जी श्री राम जी का जन्म हुआ था और मैं हिंदू हूं और हिंदुस्तान में रहता हूं और मैं हिंदुस्तानी हूं मेरा धर्म हिंदू है मेरे धर्म सनातन है श्री राम की पूजा करता हूं और उनके चरण में रहता हूं जय श्री राम
CHAITANYA BUCH
CHAITANYA BUCH 7 महीने 1 week पहले
હાલમાં જ ગુજરાતી શબ્દ "મધર" ને ભારતની કોપીરાઇટ ઓફિસ, દિલ્હી દ્વારા કોપીરાઇટ મળ્યું છે. આ કોપીરાઇટ મારા નામે, ડૉ. ચૈતન્ય સરતકુમાર બુચ (MD, Medicine), નોંધાયેલ છે. અંગ્રેજી શબ્દ MOTHER વિશ્વભરમાં પ્રચલિત છે, પરંતુ તેનો અર્થ ગુજરાતી સંદર્ભમાં એટલો અર્થસભર નથી. જ્યારે "મધર" શબ્દ "મને ધરે તે મધર" તરીકે અત્યંત અર્થસભર છે—જેમ ગદાધર, બંસીધર, ગિરિધર, અને ગંગાધર શબ્દો અર્થ આપે છે. ગુજરાતી ભાષાના હજારો વર્ષના વારસામાં તથા ભગવદ્ગોમંડળ ગુજરાતી શબ્દકોશના 2,88,000+ શબ્દોમાં પણ "મધર" શબ્દનો ઉલ્લેખ નથી. શિક્ષકો, લેખકો, કવિઓ, સાહિત્યકારો તથા વિદ્વાનો દ્વારા પણ તેનો પ્રયોગ થયેલો પુરાવો મળતો નથી. મારી વિનંતી છે કે "મધર" શબ્દને ગુજરાતી શબ્દકોશમાં સ્થાન આપશો, જેથી વૈશ્વિક ગુજરાતીઓ આ અર્થસભર શબ્દનો પ્રયોગ કરી શકે અને તેને વિશ્વભરમાં પ્રચલિત કરી શકે. આપનો આભારી, ડૉ. ચૈતન્ય સરતકુમાર બુચ (MD, Medicine) 📞 9825271800 🩷 જય ભારત 🙏
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