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25 अगस्त 2024 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मन की बात के लिए विचारों को आमंत्रित करना

Inviting Ideas for Mann Ki Baat by Prime Minister Narendra Modi on 25th August 2024
आरंभ करने की तिथि :
Aug 06, 2024
अंतिम तिथि :
Aug 23, 2024
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन विषयों और समस्याओं पर अपने ...

माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी उन विषयों और समस्याओं पर अपने विचार शेयर करना चाहते हैं, जो आपके लिए महत्वपूर्ण हैं। प्रधानमंत्री जी आपको मन की बात के 113वें एपिसोड में संबोधित किए जाने वाले विषयों पर अपने विचार शेयर करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

मन की बात के आने वाले एपिसोड में जिन विषयों या समस्याओं पर आप चाहते हैं कि प्रधानमंत्री जी बात करें, उनके बारे में हमें अपने सुझाव भेजें। इस खुले मंच में अपने विचार शेयर करें या आप वैकल्पिक रूप से टोल-फ्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल कर सकते हैं और प्रधानमंत्री जी के लिए अपने संदेश को हिंदी या अंग्रेजी किसी भी भाषा में रिकॉर्ड कर सकते हैं। रिकॉर्ड किए गए कुछ संदेश ब्रॉडकास्ट का हिस्सा बन सकते हैं।

आप 1922 पर एक मिस्ड कॉल भी दे सकते हैं और सीधे प्रधानमंत्री जी को अपने सुझाव देने के लिए SMS में मिले लिंक को फॉलो कर सकते हैं।

और 25 अगस्त 2024 को सुबह 11:00 बजे मन की बात से जुड़े रहें।

फिर से कायम कर देना
2746 सबमिशन दिखा रहा है
Abhay Pralhad Vaidya
Abhay Pralhad Vaidya 1 year 10 महीने पहले
जाती पातीच राजकारण भाग दोन - म्हणून मी आधीही लिहून पाठविलं होतं की आपल्या अखंड हिंदुस्थानात फक्त आणि फक्त हिंदुस्थानी किंवा भारतीय हा असा एकमेव धर्म असावा, दुसरे कोणतेही वेगवेगळे धर्म नसावेत, त्यानंतर स्त्री, पुरुष आणि इतर असे तिन जातीचे प्रकार असावेत, सर्व जातीपातीवरील, हा समाज, तो समाज, मागास किंवा अल्पसंख्याक वगैरे वगैरे अशी सर्व प्रकारची आरक्षणं ताबडतोब बंद व्हावीत, काही व्यक्ती किंवा काही ठरविक लहान सहान समाजातील लोकांनी अनाठायी वाढविलेली कुटुंब इतर करदात्यांवर ओझं म्हणून कदापी नसावीत, त्यांचा भार आयुष्यभर इतरांनी का सोसावा, सर्व फुकटचं मिळतंय म्हणून लोकसंख्या वाढवीत राहणं हे शंभर टक्के चुकीचं आहे, आता यापुढे तरी फक्त आणि फक्त आर्थिक दृष्ट्या मागासलेले आणि एक किंवा दोन मुलं असतील अशांनाच काही मर्यादित कालावधी पुरती  प्रोत्साहनपर कमी अधिक, छोटी मोठी कामं करून घेऊन त्याचा मोबदला म्हणून आर्थिक पाठबळ द्यावं यात सुद्धा त्यातील सर्व नागरिकांना स्वतःसह आपलं कुटुंब, आपला प्रदेश यात प्रगती करण्यास कालमर्यादा आखून फक्त प्रोत्साहन देण्यासाठी प्रयत्न व्हावेत, या पुढील भाग तिन मध्ये -
Abhay Pralhad Vaidya
Abhay Pralhad Vaidya 1 year 10 महीने पहले
जाती पातीच राजकारण भाग एक - करावयाचं सर्व समाजाचे संरक्षण! बंद करावे लांगूलचालनाचं आरक्षण!! फक्त भांडणंच लावतात आपापसात! म्हणून जात पात यांवर करावी मात!! वेगवेगळी नावं देऊन बनवितात समाज! वाढवितात फक्त अंगात वेगळाच माज!! एकमेकांचे वैरी बनून कृत्य घडवितात अधर्म! म्हणून हिंदुस्थानात असावा एकच भारत धर्म!! जाती, पाती, धर्म, समाज आणि आरक्षणं हे शब्दच आपल्या शासकिय कामकाजातून काढून टाकावेत, फक्त आर्थिक दुर्बल घटकांना स्थिरस्थावर करण्यासाठी आर्थिक मदत देण्यात येऊन त्यांच्या शैक्षणिक आणि राहणीमानाचा स्तर इतरांसारखा करण्याचे प्रयत्न व्हावेत, आता जाती निहाय जनगणना हा राजकीय विषय तापविला जात आहे इतकी वर्ष काही ठराविक राजकारणी लोकं आपल्यात जात, पात वगैरे वगैरे भांडणं लावून स्वतःची तुंबडी भरून घेत आहेत आणि सर्वसामान्य भोळी जनता हे असह्य असं वर्तन मुकाट पणे तोंड दाबून बुक्क्यांचा मार खात सहन करीत आहे, हे परदेशी आणि आपल्या कडील बरींच जणं याचा फायदा करून घेत आपापल्या पोळ्या भाजून घेत असून इतर सर्वांना खड्ड्यात घालत आहेत या पुढील भाग दोन मध्ये -
Abhay Pralhad Vaidya
Abhay Pralhad Vaidya 1 year 10 महीने पहले
स्थानिक प्रशासन, राज्य शासन, केंद्र शासन या कोणी काहीं सांगण्यापेक्षा ज्यांना ज्यांना पटेल अशा प्रत्येक विक्रेत्याने म्हणजेच ते रस्त्यावरचे फेरीवाले, टपरीवाले, छोटे मोठे दुकानदार असोत की छोटे कारखानदार असोत प्रत्येकानं आपलं स्वतःचं नाव, कामं करीत असलेल्यांची शक्य तेव्हढी नावं आधार च्या फोटो सहीत, वंदे मातरम, जय हिंद, जय श्रीराम, ॐ, 108 वगैरें वगैरें हे सर्व भगव्या म्हणजेच केशरी रंगात आणि ज्याला जे जे पटेल तसं तसं लिहावं, हे सर्व सामान्य जनतेस, खरेदीदार म्हणजेच ग्राहकांस व्यवस्थित व सुस्पष्ट दिसतील अशा स्वरूपात प्रदर्शित करावीत, मोठ मोठ्या कारखानदारांनी कंपनी बरोबरच स्वतःची नावं त्यांच्या उत्पादनांवर सुस्पष्ट लिहावीत, त्यानंतर मग ग्राहक कोणाकडून काय काय घ्यायचं की नाही वगैरें ते त्यांचं ते पहातील आणि घेतील, यात कोणाचीच वादावादी, भांडणं होणार नाहीत व न्यायपालिकेसही उगाचंच त्रास देऊन यात पडावयची गरज भासणार नाही,
Praveen Kumar Kulkarni
Praveen Kumar Kulkarni 1 year 10 महीने पहले
Our startup has signed MoUs with Gujarat and Uttarakhand state Govts in the Investor summits to create 150jobs/Gram Panchayat and also to provide an easy access to the Cold storage to all the Farmers of the GP, thus, avoid migration of youth to the Cities. The elected Chief Ministers have written 4 letters to the Energy secretary of Gujarat to facilitate our MoU, but, the Energy secretary has never replied since 8 months! Because, these IAS officers are PMO Krupa poshit & are immune from any action, despite CMO writing to them, thus, the rural youth are deprived from getting the jobs & the farmers are unable to save 35% of the produce due to no Cold storage, thus, SASHAKTA GRAM vision of our start up is not getting realised & I sent a Grievance to you, but, request u to address this issue in the MANN KI BAAT to listen to the MANN KI BAAT of Startups / new generation entrepreneurs & punish the delaying officers of Gujarat & Uttarakhand.
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satha sivam
satha sivam 1 year 10 महीने पहले
எனது மனம் நிறைந்த வணக்கம் உங்களுக்கு எனது பணிவான வேண்டுகோள் என்னவென்றால் நமது நாட்டில் விவசாயம் அதிகமாக நடைபெறுவது கிராமங்களில் விவசாய தோட்டத்தில் வேலை செய்யும்பொழுது விஷ சத்துக்கள் (பாம்பு) இடம் ஆபத்து அதிகமாக உள்ளது . இதனால் பாதிக்கப்பட்டால் சிகிசைக்கு (மருத்துவமனை) நகர்புறங்களுக்கு செல்ல வேண்டியுள்ளது இது நேரம் அதிகம் ஆவதால் உயிர் இழப்பு அதிகம் ஆகிறது .எனவே கிராமபுரங்க்களில் உள்ள ஆரம்ப சுகாதாரநிலையாக்களில் 24 மணிநேரமும் சிகிக்சை அளித்தால் இதனால் பாதிக்கப்பட்டவர் உயிர் பாதிப்பின்றி குடுப்பதிற்கும் நாட்டிற்கும் பயன்படுவர் . இதை தயவு கூர்ந்து கருத்தில் கொள்ளுமாறு கேட்டுக்கொள்கிறேன் .
RavindraNathKushwaha
RavindraNathKushwaha 1 year 10 महीने पहले
किसान की परिभाषा : मात्र कृषि भूमि होने से किसान नहीं माना जाय- धान की खेती पर 20% किसान + गेहूं की खेती पर 20% किसान + दलहन की खेती पर 20% किसान + तिलहन की खेती पर 20% किसान+ दुधारू पशु रखने पर 20% किसान = 100 % किसान . यदि किसी कारण से दुधारू पशु रखने में अधिक कठिनाई हो तो उसके बदले एक फलदार वृक्ष परिवार में हो अथवा एक फलदार वृक्ष के स्थान पर कोई अन्य पांच बृक्ष / या कम से कम 100 वर्ग मीटर का एक छोटा तालाब हो . किसान सम्मान निधि / अन्य सरकारी सुविधा इसी अनुपात में रखने से हर किसान पूर्ण किसान बनने का प्रयास करेंगे जिससे दालों, खाद्य तेलों, दूध /वृक्ष / तालाब की संख्या बढ़ने में मदद मिलेगी. पूर्ण किसान का लक्ष्य पूरा करने पर सरकारी कर्मचारी होने पर भी उसको किसान की सुविधा देने का विचार किया जा सकता है , उत्तर प्रदेश के लिए ऐसा सुझाव दिया है, अन्य प्रदेशों की सरकारें अन्य किन्ही पांच आवश्यक फसलो का अपनी जलवायु / परिस्थितियों के अनुसार चयन कर सकती हैं .
V PADMANABHAN
V PADMANABHAN 1 year 10 महीने पहले
Respected Prime Minister Sir, I feel the roads in the villages are not properly connected to the main roads or highways in many of the villages. I feel this should be taken up and the problem should be addressed. Further, in many villages drinking water problem is widely prevalent in states like Tamil Nadu, Odisha, Karnataka and Maharashtra and I saw a video in which they showed women walking for three to four kms to fetch water. These areas should be identifiid and the problem address by digging borewells canals etc. Same is the case with schools and colleges which are located very far away from certain villages. I feel the CSR policy which provides for addressing the needs of people in the local area in which the company is situated should be changed and made broadbased so that companies could take up CSR activity in which area needs more attention. Further, it may be appreciated that in States like Bihar there may not be companies which could undertake CSR activity.
Swapnil Dinkar Nawkar
Swapnil Dinkar Nawkar 1 year 10 महीने पहले
स्वप्निल दिनकर नावकार जिला अकोला,महाराष्ट्र.444001 swapnilnawkar@gmail.com 21 अगस्त 2024. सेवा मे, प्रधानमंत्री कार्यालय,साऊथ ब्लॉक,नई दिल्ली -110011 विषय:बालकों और महिलाओं के संरक्षण हेतू सुझाव.
RamachandiranV
RamachandiranV 1 year 10 महीने पहले
Being one of the largest democratic country, we need to establish a strong untampered compliance system digitally to monitor and control every govt entities/activities. The violators, should be identified and automatically actioned with respective department. We need strong JUSTICE for every punishment/violations rather we provide JUDGEMENT nowadays. I have around 40 years of IT experience among 25 years with UAE Govt and wish to contribute something our own country for good. Looking forward to reach to the right channel.
JuhiRaghuwanshi
JuhiRaghuwanshi 1 year 10 महीने पहले
माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी भारत सरकार विषय:: भारत में भिक्षावृत्ति कानून लागू कर सख्ती से रोक लगाने बाबत। मान्यवर, इस बात से आप भी अनभिज्ञ न होंगे की भारत में भिक्षावृत्ति ने अब गैर कानूनी व्यापार का रूप पूर्ण तह ले लिया है और इनका तंत्र भारत के बाहरी देशों द्वारा संचालित होता है ,यह देश की सुरक्षा के लिए भारत के दुश्मनों का एक घातक और अभी तक छुपा हुआ हत्यार है,सभी बड़ी सिटीज में लाल बत्तियों पर चौराहों पर भिकारियों के गैंग सक्रिय हैं जिनमे जादातार अगवाह किए हुए बच्चे और महिलाएं होती है। इन गिरोह के सरगनह इन अगवाह किए हुए मंसूमो को अपंग बनाकर इनसे भीख मंगवाते हैं।यह मानव तस्करी का ही एक अंग बन चुका है।आपकी कार्यशैली इतनी तीव्र है आप भिक्षावृत्ति पर संपूर्ण भारत के लिए कानून पारित करने के विषय पर भी विचार अवश्य कीजिए और सख्ती से इसका पालन कराने के निर्देश पारित कीजिए ।इस भिक्षावृत्ति तंत्र को यदि हमने तोड़ दिया तो हम एक जाति विशेष को भी अंदरूनी तौर पर पैर पसारने से रोक पाएंगे ।बच्चो और महिलाओं के संरक्षण विचारणीय प्रश्न है कृपया भिक्षावृत्ति कानून लागू करें।