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27 जुलाई 2025 के मन की बात कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझाव भेजें

27 जुलाई 2025 के मन की बात कार्यक्रम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने सुझाव भेजें
आरंभ करने की तिथि :
Jul 08, 2025
अंतिम तिथि :
Jul 25, 2025
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और ...

माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आपके लिए महत्वपूर्ण विषयों और मुद्दों पर अपने विचार साझा करने के लिए उत्सुक हैं। प्रधानमंत्री आपको मन की बात के 124वें एपिसोड में संबोधित किए जाने वाले विषयों पर अपने विचार साझा करने के लिए आमंत्रित करते हैं।

आने वाले मन की बात एपिसोड में आप जिन विषयों या मुद्दों के बारे में प्रधानमंत्री से बात करना चाहते हैं, उनसे जुड़े अपने सुझाव हमें भेजें। इस ओपन फ़ोरम में अपने विचार शेयर करें या वैकल्पिक रूप से, आप टोल-फ़्री नंबर 1800-11-7800 पर कॉल भी कर सकते हैं और प्रधानमंत्री के लिए अपना संदेश हिंदी या अंग्रेज़ी में रिकॉर्ड कर सकते हैं। रिकॉर्ड किए गए कुछ संदेश प्रसारण का हिस्सा बन सकते हैं।

आप 1922 पर एक मिस्ड कॉल भी दे सकते हैं और SMS में मिले लिंक को फ़ॉलो करके सीधे प्रधानमंत्री जी को अपने सुझाव दे सकते हैं।

और 27 जुलाई 2025 को सुबह 11:00 बजे मन की बात के साथ जुड़े रहें।

फिर से कायम कर देना
2557 सबमिशन दिखा रहा है
Vijay Udas
Vijay Udas 1 year 2 सप्ताह पहले
1. Public behaviour,civics sence teachings in primary schools. 2. Political corruption cleansing There my be some improvement in the high level corruption, but it is still rampant in low levels. Severe punishment and recovery should act as deterent. Loss of govt job for corruption convict is a good solution.
L TEGRA
L TEGRA 1 year 2 सप्ताह पहले
గౌరవనీయ ప్రధాని శ్రీ నరేంద్ర మోదీ గారికి, మీ మార్గదర్శకత్వంలో దేశ అభివృద్ధి కొనసాగుతోంది. గ్రామీణ ప్రజల జీవితాల్లో గణనీయమైన మార్పు రావాలంటే కొన్ని ముఖ్యమైన అంశాలపై దృష్టి కావాలి. 1. ప్రతి గ్రామంలో డిజిటల్ లిటరసీ సెంటర్లు ఏర్పాటుచేయండి – యువతకు ఐటీ ఉపాధి అవకాశాలు అందుతాయి. 2. పోషణకు గ్రామస్థాయిలో NGOలు, మహిళా సంఘాల భాగస్వామ్యం పెంచండి. 3. మొబైల్ ఆరోగ్య సేవలు అందుబాటులోకి తేవండి – చిన్న పిల్లల ఆరోగ్య పరిరక్షణకు ఇది అవసరం. 4. పంచాయతీ ఖర్చులపై సామాజిక ఆడిట్లు నిర్బంధంగా చేయండి – పారదర్శకతకు ఇది కీలకం. 5. గ్రామాల్లో పిల్లల కోసం క్రీడా మైదానాలు, పాఠశాలలలో తినుబండారాల నాణ్యతపై దృష్టి పెట్టండి. మీరు ఈ అంశాలను పరిగణనలోకి తీసుకుంటారని ఆశిస్తున్నాను. ధన్యవాదాలతో, లాచంశెట్టి టేగ్రా ప్రకాశం జిల్లా, ఆంధ్రప్రదేశ్
Deepali Hingne adv
Deepali Hingne adv 1 year 2 सप्ताह पहले
nature expected from humans that should change according to changing aspect which also insert in law 4example if citizen civic sense fallow rules not teach but if observe by sorrounding now in digital era should habituated own responsibility- if India image in outside goes un clean all people should at least area clean but no ईन्सान ना बदलता है ना सुधरता है प्रकृती बदलती है ईन्सान को लगता है उसने बदलाव लाया पर बदला तो फीर प्रकृती ही लेती है जिस समंदर के sea face का craze है लोगो को उसके आसपास plastic कचरा वही नजदीक illigal or else residencial area even railway cause to safty then that garbage/drain spread,every city same city lavish&slum what politician do.. समंदर की लहरे सतहपर plain gorund just waves but वही पत्थर पर टकराकर उछलती है और बुंद छिंटे बनती है ..
Seema Mina
Seema Mina 1 year 2 सप्ताह पहले
Mera mahilao se juda sujho hai.aaj Bhale hi hum bhut pad likh gaye ho parantu ye bolne ki baat hai mahila par aaj bhi padhe likhe samaj mein aurato ko Bara bari ka darja nahi milta .bhar jitna marzi dikhawa kar le ye kin ye gharelu level par aaj bhi aurto ko koi Bara bar ka right nahi hai.bhut bade istar par padhe likhe log iska smarthan karte hai.kanoon vyavsta bhut kharab hai sab approach laga ke pad ka dur upyog kar ke case ko prabhavit karte hai .is badlav Lana hoga .
Md Firoz Alam
Md Firoz Alam 1 year 2 सप्ताह पहले
सबसे पहली बात कि जिस प्रकार मन की बात योजना चला रहे हैं उसके माध्यम से मैं आपको कुछ बात का अपना राय व्यक्त कर रहा हु जिस प्रकार डिजिटल इंडिया से हमारे आने वाले बच्चों के बारे में आने वाले भविष्य के बारे में ध्यान लगता करने के प्रयास कर रहा हूं 18 साल के उम्र के लड़के लड़कियां को एंड्रॉयड वर्जन मोबाइल एवं सोशल मीडिया इस्तेमाल करना जुर्म समझा जाए और इसके ऊपर शक कानून बनाया जाए क्योंकि जैसे हम देख पा रहे हैं अपने समाज के अंदर हर कोई गर्जन अपने बच्चों को खुश करने के लिए 2 साल के बच्चे के हाथ में मोबाइल दे दिया जाता है जो कि सोशल मीडिया पर बहुत सारे ऐसे एक से भी आते हैं जिसको नहीं देखने की जरूरत होता है बच्चों को भी देख लेते हैं और उसका मानसिक संतुलन में बहुत प्रभाव होता है इस पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत है पूरे देश में अगर देखा जाए तो 2 साल से लेकर 18 साल युवा के बच्चे दिमागी संतुलन ठीक नहीं रहते हैं इसको देखते हुए इस पर रिसर्च टीम लगानी चाहिए और टेक्नोलॉजी के माध्यम से इस पर रोक लगनी चाहिए इससे आपका साइबर क्राइम भी काम हो सकता है साइबर क्राइम में सबसे ज्यादा युवा लड़के शिकार हो रहे है