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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 30 जनवरी 2022 को मन की बात सुनने के लिए, जुड़े रहे!

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की 30 जनवरी 2022 को मन की बात सुनने के लिए, जुड़े रहे!

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Shwetav Kumar
Shwetav Kumar 4 साल 5 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी न्यायालगयों में आज वकीलों के लिए वकालत हेतू सुविधाओं का अभाव हैं जिसे दूर किया जाना चाहिए। साथ ही अपने देश की न्यायपालिका व्यवस्था में सप्रथम हिंदी, उसके बाद क्षेत्रीय भाषा एवं उसके बाद अन्तर्राष्ट्रीय भाषा की व्यवस्था की जानी चाहिए। इसे के तहत आम आदमी की पहुंच न्याय के लिए तैयार की जा सकती हैं।
Somya
Somya 4 साल 5 महीने पहले
प्रति, सम्माननीय प्रधानमंत्री महोदय, भारत सरकार, नई दिल्ली 🌱विषय:- वर्ष 2005 के पूर्व की भांति पेंशन लाभ दिलाया जाकर आत्मनिर्भर जीवन हेतु विनम्र आग्रह….🙏 महोदय, मेरे मन की बात आपके साथ सादर निम्नानुसार है:- 🌺वर्ष 2005 से पूर्व मिलने वाली पेंशन व परिवार पेंशन के लाभ से शासकीय सेवकों को वंचित कर बाजारवाद (NPS) के हवाले कर दिया जबकि 2005 से पूर्व की पेंशन नीति ही शासकीय सेवकों के सेवा निवृत्त होने के बाद बुढ़ापे की मजबूत लाठी है, आत्मसम्मान का ताज है जो कि वृद्धावस्था में आत्मनिर्भर होने का एक स्वर्णिम सपना भी होता है। 🌺जबकि जन प्रतिनिधि पूर्व में रहे कई-कई पदों की पेंशन का लाभ प्राप्त कर रहे हैं लेकिन हम शासकीय सेवकों को उसी पेंशन के लाभ से वंचित कर सरासर पक्षपात किया जा रहा है। 🙏आपसे विनम्र अपील है आग्रह और आशा है कि "एक राष्ट्र - एक विधान, सबको शिक्षा-सबको काम" और "हमारी उक्त समस्या का भी करेंगे अविलंब श्रेष्ठ निदान"। 🇮🇳जय हिन्द । 🙏आपके ही राष्ट्र का नागरिक और शासकीय सेवक🙏
Shwetav Kumar
Shwetav Kumar 4 साल 5 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी आज ग्राम कचहरी की आवश्यकता पर ध्यान दिये जाने की जरूरत हैं जिससे की आम लोगों को जल्द से जल्द न्याय मिले। इसकी व्यवस्था में सुधार की ओर ध्यान दिये जाने की जरूरत हैं।
VIVEK SHUKLA
VIVEK SHUKLA 4 साल 5 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, सादर अभिवादन आपके समग्र और दृण निश्चयी प्रयासों से स्वच्छता के प्रति आम जनमानस में काफी जागरूकता आयी है, आम सड़कें, गलियाँ, पार्क, रेलवे प्लेटफॉर्म्स इत्यादि सार्वजनिक स्थलों पर साफ़ सफाई देखी जा सकती है जैसे की पहले कभी भी नहीं थी, ये सोच से भी परे था कि रेलवे में भी साफ़ सफाई हो सकती है,आपकी अगुवाई में भारत सरकार के सहयोग और जनता के प्रयासों से ऐसा मुमकिन हुआ है, अगर कोरोना की परिस्थति में भी जनता को बाहर शौच के लिए जाना पड़ता और इतनी साफ़ सफाई न होती तो निश्चित रूप से कोरोना द्वारा दिया गया आघात बहुत भयावह होता। आज जब स्वच्छता और साफ़ सफाई,भारतीय नागरिक के लिए इतनी आवश्यक बन गयी है तब मेरा सुझाव है कि-स्वच्छ रहना, आस पास का वातावरण स्वच्छ रखना और स्वच्छता के प्रति सदैव प्रयास करना - को भारतीय संविधान में वर्णित मूल कर्तव्यों में शामिल कर दिया जाना चाहिए। सबको फ्री और समय पर वैक्सीन देकर भी आपने जनता के प्रति सरकार के उत्तरदायित्व को नया आयाम दिया है। बहुत बहुत धन्यवाद् और आभार विवेक शुक्ला, अधिवक्ता और शोधार्थी (राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय बैंगलोर