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वार्ता
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
today humans are most dangerous animals for human why?
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
Implement Vidyatattvam Paddhati for the welfare of the entire society.
it is a supper system, has solutions for all problems.
will give the clean & the truthful society,This system will give you the desired results within 15-20 years.
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NIDHI SHARMA
10 साल 11 महीने पहले
we must not ignore the rights and needs of our most respected teachers. our education system can be empowered if we protect the rights of our teachers and provide them the best facilities.
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
Why you are not implementing Vidyatattvam paddhati?
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NIDHI SHARMA
10 साल 11 महीने पहले
Respected sir,
presently our education system is just making the students literate but not educated by just providing them the bookish knowledge. students can be educated in real sense with the help of value education
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
1. शिक्षा (Education) संसार से शरीर तक मात्र जड पदार्थों की जानकारी
2. स्वाध्याय (Self Realization) शरीर से जीव (रूह – सेल्फ) तक की जानकारी व दर्शन
3. अध्यात्म (Spiritualization) जीव से आत्मा (नूर – सोल) तक की जानकारी व दर्शन
4. तत्त्वज्ञान (True, Supreme & Perfect KNOWLEDGE) अथवा विद्यातत्त्वम् पद्धति
परमाणु से परमात्मा (खुदा-गॉड) की सम्पूर्ण जानकारी सहित दर्शन
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
please implement Vidyatattvam paddhati,
क्या है विद्यातत्त्वम् पद्धति ? – NEW EDUCATION SYSTEM
विद्यातत्त्वम् पद्धति को ही परम विद्या भी कहा जाता है जिसका एक उपांग शिक्षा है । ‘विद्यातत्त्वम् पद्धति’ के अन्तर्गत (1) शिक्षा (EDUCATION) (2) स्वाध्याय (SELF-REALIZATION) (3) अध्यात्म (SPRITUALIZATION) (4) तत्त्वज्ञान (TRUE SUPREME AND PERFECT KNOWLEDGE) ये चार विधान आते है जिससे ही सम्पूर्ण की सम्पूर्णतया- संसार, शरीर, जीव, आत्मा, परमात्मा की अलग-अलग जानकारी-दर्शन होता है ।
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
वास्तव में जब तक पिण्ड और ब्रह्माण्ड के तुलनात्मक अध्ययन के साथ उसमें आपस में तालमेल बनाये रखने हेतु पृथक्-पृथक् पिण्ड और ब्रह्माण्ड की यथार्थतः प्रायौगिक और व्यावहारिक जानकारी तथा ब्रह्माण्डीय विधान मात्र ही पिण्ड का भी विधि-विधान यानी स्थायी एवं निश्चयात्मक विधि-विधान ही नहीं होगा तथा एक मात्र ब्रह्माण्डीय विधि-विधान को अध्ययन पद्धति या शिक्षा प्रणाली के रूप में लागू नहीं किया जायेगा, तब तक अभाव एवं अव्यवस्था दूर नहीं किया जा सकता है, कदापि दूर हो ही नहीं सकता ।
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
Why this education system is collapsing?
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Prakash KC
10 साल 11 महीने पहले
How you develop best teachers?
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