suresh kumar
1 year 11 महीने पहले
चन्द्रयान 3 की सफलता के अवसर पर भारतीय ज्ञान परम्परा के खगोलीय सूत्रों को वैज्ञानिक दृष्टि से सिद्ध करने के लिए गहन वैज्ञानिक अध्ययन करके अन्तरिक्ष विज्ञान की प्राचीन परम्परा को आगे ले जाने के लिए मोदी जी की अपील ने देश में बहुआयामी मौलिक वैज्ञानिक शौध को प्रेरित कर दिया है। वैदिक ज्ञान परम्परा के वैज्ञानिक संदेश ब्रह्माण्ड के निर्माण और जीवन के सृजन के अधूरे पड़े आधुनिक वैज्ञानिक सिद्धांतों को प्रयोगजन्य साक्ष्यों द्वारा नया रूप प्रदान करके उन्हें पूर्ण करने में सक्षम है।
वेद वाक्य तत् पिण्डे यत् ब्रह्माण्डे में एक प्राणी और एक तारे की समान लाइफ साइकिल की पूर्ण वैज्ञानिक अभिव्यक्ति है। एक प्राणी के जन्म और विकास की प्रक्रिया का गहन अध्ययन करके उसे एक अन्तरिक्षीय पिण्ड के जन्म और विकास पर लागू किया जा सकता है। इसे प्रयोगों से साबित करने हेतु असामान्य विश्व परिकल्पना मौदी जी की प्रेरणा से विकसित हुई। इस परिकल्पना को किसी भी वैज्ञानिक तथ्य से अस्वीकृत नहीं किया जा सकता है। इसे केवल अन्तरिक्ष में प्रयोग करके साबित किया जा सकता है। परिकल्पना www.asamanyavishwa पर उपलब्ध है।
पसंद
(2)
नापसन्द
(0)
जवाब दो
स्पैम की रिपोर्ट करें