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कविता / गीत प्रतियोगिता

आरंभ करने की तिथि :
Jun 28, 2018
अंतिम तिथि :
Aug 15, 2018
10:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) देश में तेल संरक्षण को ...

पेट्रोलियम संरक्षण अनुसंधान संघ (पीसीआरए) देश में तेल संरक्षण को राष्ट्रीय आंदोलन बनाने के लिए प्रतिबद्ध संस्था है, जो पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के तहत कार्यरत है। तेल संरक्षण की मुहिम के तहत कविता / गीत प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है।

भाषा:
प्रतियोगिता केवल हिंदी में आयोजित की जाएगी (देवनागरी लिपि में)

विषय:
बेहतर पर्यावरण और स्वास्थ्य के लिए तेल बचत

वर्ग:
प्रतियोगिता निम्नलिखित तीन वर्गों में आयोजित की जाएगी:
1. भारत में मान्यता प्राप्त बोर्ड से संबद्ध स्कूल के छात्र (छात्रों को अपनी प्रविष्टि के साथ स्कूल की वैध आईडी की प्रति अपलोड करनी होगी)
2. कॉलेज / विश्वविद्यालय के छात्रों (छात्रों को अपनी प्रविष्टि के साथ कॉलेज / विश्वविद्यालय की वैध आईडी की प्रति अपलोड करनी होगी)
3. ओपन - जन सामान्य के लिए

पुरस्कार :
पहला पुरस्कार (प्रत्येक श्रेणी में एक): ब्रांडेड टैब या मोबाइल हैंडसेट (प्रत्येक लगभग 20,000 रुपये की कीमत )
दूसरा पुरस्कार (प्रत्येक श्रेणी में से एक): 10,000 रुपये / - (गिफ्ट वाउचर)
तीसरा पुरस्कार (प्रत्येक श्रेणी में से एक): 5,000 रुपये / - (गिफ्ट वाउचर)
पांच सांत्वना पुरस्कार (प्रत्येक श्रेणी में): 3,000 रुपये / - (गिफ्ट वाउचर)

जमा करने की अंतिम तिथि 15 अगस्त 2018 है।

नियमों और शर्तों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें

प्रतियोगिता से संबंधित किसी भी प्रश्न के लिए लिखें:
श्री तारा चंद
निदेशक, ईसी
फोन - 011-2619880 9
ईमेल - direc@pcra.org

इस कार्य के लिए प्राप्त हुई प्रविष्टियाँ
1261
कुल
518
स्वीकृत
743
समीक्षाधीन
फिर से कायम कर देना
518 सबमिशन दिखा रहा है
Rajesh vashishtha
Rajesh vashishtha 7 साल 12 महीने पहले
Poem पर्यावरण का करें वरण जैसे जन्म मरण पारण फूल रहा पृथ्वी का दम क्योंकि हवा के बहके कदम पैदल चलने की आदत डालें बिना वजह वाहन ना निकाले फ्यूल को ना उड़ाएं फिजूल वर्ना यह होगी जिंगदी की बड़ी भूल इलेक्ट्रिक वाहनो का करें प्रयोग तो होगी हवा शुद्ध और शरीर निरोग
Nikhil choudhary
Nikhil choudhary 7 साल 12 महीने पहले
सीमित हैं ये सारे ईंधन, बर्वाद न करो बिन काम की ।। प्राप्त करो अधिक जानकारी, सौर उर्जा व गोबर गैस की । जिसका उपयोग करना है , संरक्षण हेतु पाकृतिक ईंधन की ।। बचाएँ ईंधन बचाएँ धरती , यह दायित्व हमारी है ।। जन-जन हो जागरूक इस हेतु , यह उत्तरदायित्व हमारी है।। कल न हो कोई संकट ईंधन की , इस हेतु आज हमे बदलना है । खोज करे नये उर्जा की, जिससे खुशहाल हो हमारा भविष्य ।।
Alok vishvakarma
Alok vishvakarma 7 साल 12 महीने पहले
महंगाई पर लिखें या बिज़ली कटौती पर कभी समझ में नहीं आता है, अखबार में पढ़ते हैं विकास दर बढ़ने के आसार शायद महंगाई बढ़ाती होगी उसके आंकड़ें मगर घटती बिज़ली देखकर पुराने अंधेरों की तरफ बढ़ता यह देश नज़र आता है। ———– सर्वशक्तिमान को भूलकर बिज़ली के सामानों में मन लगाया, बिज़ली कटौती बन रही परंपरा इसलिये अंधेरों से लड़ने के लिये सर्वशक्तिमान का नाम याद आया। ———– पेट्रोल रोज महंगा हो जाता, फिर भी आदमी पैदल नहीं नज़र आता है, लगता है - अलोक विश्वकर्मा