Adv Praveen Pratap
5 years 1 week ago
सर
शिक्षा मानव का हक है और सरकार का फर्ज
प्राइवेट शिक्षा संस्थानों ने शिक्षा को व्यापार बना दिया है,जब कोई व्यक्ति शिक्षा संस्थान को शुरू करता है तो वह सुसायटी का रजिस्ट्रेशन कराता है तो एक शपथपत्र इस आशय का देता है कि वह बिना किसी लाभ के समाज सेवा करेगा,और इस प्रकार के कई शपथ पत्र देता है।और अपने उस संस्थान को एक प्रकार से राज्य में समाहित कर देता है।
किंतु देखने को मिलता है कि वह उसके मार्फत आमजन का शोषण करता है।और शिक्षा का उच्च स्तरीय विक्रय करता है।
जो एक गंभीर अपराध है।
कृपया इस पर गौर करे
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