Samvid Sharma
2 years 6 months ago
आदरणीय प्रधानमंत्री जी,
आज मुझे अवसर मिला वाल्मीकि रामायण का १०० व सर्ग पड़ने को मिला और पता चला कि कितने ज्ञान के भण्डार से भरे हुए है हमारे हिन्दू ग्रंथ । उसमे उल्लेखित है कि राजा को किन चीज का ध्यान देना चाहिए जो उसे नहीं करनी चाहिए। वह इस प्रकार है: ‘नास्तिकता, असत्य—भाषण, क्रोध, प्रमाद, दीर्घसूत्रता, ज्ञानी पुरुषों का संग न करना, आलस्य, नेत्र आदि पांचों इंद्रियों के वशीभूत होना, राजकार्यों के विषय में अकेले ही विचार करना, प्रयोजन को न समझने वाले विपरीतदर्शी मुखों से सलाह लेना, निश्चित किए हुए कार्यों का शीघ्र प्रारंभ न करना तथा सब शत्रुओं पर एक ही साथ चड़ाई कर देना – यह राजा के चौदह दोष है ।
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