dinesh vats
2 years 6 months ago
मान्यवर, जेल में बंद व्यक्तियों को समानता और वोट देने के अधिकार को सुनिश्चित करना चाहिए। केवल आरोप और दोषारोपण के कारण किसी को जेल नहीं भेजा जाना चाहिए।
आज बहुत सारे निर्दोष लोग जेल में बंद हैं और बहुत सारे लोग बिना किसी सबूत और ठोस आधार के सालों-साल लंबी कानूनी प्रताड़ना का शिकार है। Justice delayed is Justice denied. किंतु आज भी प्रक्रिया कोमा के दौर में है। कानपुर के विष्णु तिवारी का मामला साक्षात भ्रष्टाचार और न्यायिक तंत्र की खामियों का प्रत्यक्ष प्रमाण है। समानता का अधिकार सबको मिलना चाहिए। कानून को खिलौना बनाकर खेलने वालों को दण्ड दिया जाना चाहिए।
सेवानिवृत्ति के बाद किसी भी व्यक्ति को किसी भी प्रकार की सरकारी नौकरी या सलाहकार नियुक्त करने पर पूर्ण पाबंदी होनी चाहिए। पुलिस में व्याप्त भ्रष्टाचार समाप्त होना चाहिए। न्यायिक सेवा अधिक पारदर्शी, त्वरित, भाई भतीजावाद रहित और आम आदमी की मित्रवत प्रणाली होनी चाहिए। झूठे मुकदमे में फंसने से कैसे बचें और नयायधीशो के सम्मुख कैसा आचरण रखें, ये स्कूल, आंगनवाड़ी, दूरदर्शन और पंचायती पाठ्यक्रम का हिस्सा होना चाहिए।
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