Ashish Rastogi
1 year 8 months ago
आदरणीय श्री प्रधानमंत्री जी सादर प्रणाम, मैं अक्सर अपने विचार और विषय इस मंच पर साझा करता रहता हूं। जिसमें शिक्षा, स्वास्थ्य और जनकल्याणकारी विषय जिनका उद्देश्य केवल समाज के प्रत्येक वर्ग को लाभ हो सके। आज भी मैं आपसे अनुरोध करूंगा, कि आप बढ़ते हुए शिक्षा के व्यवसायिकरण पर रोक लगाये, क्योंकि शिक्षा का उद्देश्य और हक देश के प्रत्येक बच्चे तक पहुंचना है। जो आज व्यवसाय का सबसे बड़ा माध्यम बन कर रह गया है। अब इसमें चाहे सरकारी संस्था हो या निजी संस्थान दोनों ही जगह शिक्षा का व्यवसायीकरण चर्म पर है। शिक्षा के मंदिरों को व्यवसाय का केंद्र बनाया हुआ है। एक तरफ हम डिजिटल और स्मार्ट क्लास की बात करते हैं, शिक्षा के स्तर में सुधार और पद्धति परिर्वतन जैसे विचार रखते तो है। लेकिन जब निष्कर्ष की बात करते हैं, तो अर्थ शुन्य हो जाता है। साहित्य, संस्कृति और सभ्यता जैसे शब्द सिर्फ विचारों तक ही सीमित है। पुस्तकों के पाठ्यक्रम की बात करें। तो ढुंढना मुश्किल है। क्या अभाव है और क्या प्रभाव में, समझ ही नहीं आ रहा। ऐसे में विकास और विस्तार की नीति बिना सुदृढ़ शिक्षा के कैसे संभव है।
धन्यवाद
आशीष रस्तोगी
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