Shailendra kumar singh
4 months 2 weeks ago
आजमगढ़ के लाछिरामपुर गांव के बुजुर्ग किसान शिवगोविंद सिंह की जिंदगी उनकी जमीन से जुड़ी थी। पिता से मिली करीब 1.919 हेक्टेयर जमीन ही उनका सहारा थी। 2007 में चकबंदी के दौरान उन्होंने अपनी जरूरतों के कारण थोड़ी जमीन सूया देवी को कानूनी तरीके से बेच दी। बाद में सूया देवी ने उसी जमीन का हिस्सा गायत्री सिंह को बेच दिया। समस्या तब शुरू हुई जब 2013 में कोर्ट के आदेशों में कथित ओवरराइटिंग कर दी गई। 485 कड़ी की जगह 970 कड़ी दर्ज हो गई और रिकॉर्ड में गड़बड़ी करते हुए शिवगोविंद सिंह की पूरी जमीन सूया देवी के नाम चढ़ा दी गई। धीरे-धीरे उड़न खतौनी में उनका नाम पूरी तरह हटा दिया गया। शिवगोविंद सिंह ने इसे फर्जीवाड़ा बताते हुए डीएम से शिकायत की, जांच की मांग की और संबंधित अधिकारियों पर कार्रवाई की बात उठाई। उन्होंने कई मुकदमे भी दायर किए, लेकिन तारीखें मिलती रहीं और सुनवाई आगे नहीं बढ़ पाई। हार्ट के मरीज होने के बावजूद वे लगातार न्याय के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उनकी मांग है कि उनकी जमीन फिर से उनके नाम दर्ज हो और दोषियों को सजा मिले। यह कहानी एक किसान की है, जो अन्याय के खिलाफ आज भी डटा हुआ है।
mygov_177651231245412461.pdf
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