krishna kant rai
5 years 1 month ago
महोदय प्रणाम ,
हमारे पुर्वज जजिया कर देते थे हमें अब एहसास हो रहा है .कि हिन्दू बने रहने के लिए कितनी कठिन परिस्थितियों में जजिया कर दिए होंगे हम भी जजिया कर अदा किये तो एहसास हुआ अगले मन की बात में नमक रोटी खा कर देने की बात किये थे अब तो कर्जा ले कर जमा करना पड़ रहा
जय हो जनता की जय हो सरकार की
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