Gagan_11
11 years 3 months ago
‘सा विद्या या विमुक्तये’’
अर्थात् ‘‘विद्या वही है जो मुक्ति दे’
यथार्थतः विद्या वही है जो मुक्ति तो दिखा
ही दे साथ ही साथ विद्या से युक्त तथा उसके अनुसार रहने एवं कार्य करने वाले की भावी
बन्धनों से भी रक्षा करती रहे अर्थात् भविष्य में भी विद्यावान् अर्थात् विद्वान् (ज्ञानी) पुरुष
कर्म-बन्धन में न फँस (बँध) सके ।
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