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गुणवत्तापरक शिक्षकों के लिए अध्यापक शिक्षा में सुधार लाना

आरंभ करने की तिथि :
Jan 22, 2015
अंतिम तिथि :
Nov 01, 2015
00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षकों का क्षमता निर्माण और उन्हें ...

गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए शिक्षकों का क्षमता निर्माण और उन्हें अभिप्रेरित करना महत्वपूर्ण है। अध्यापकों की कमी, गणित, विज्ञान और भाषा में माध्यमिक स्कूल अध्यापकों की कमी, सेवा पूर्व अध्यापकों की गुणवत्ता में सुधार लाने और सेवाकालीन अध्यापकों के व्यावसायिक विकास, एक व्यवसाय के रूप में अध्यापन के स्तर को बढ़ाने, अध्यापकों के अभिप्रेरण में सुधार लाने और अधिगम परिणामों के लिए उनकी जवाबदेही सुनिश्चित करने तथा अध्यापक-शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार लाने जैसी समस्याओं को हल करने के लिए अनेक पहल की जा रही हैं। इस प्रकरण का उद्देश्य, मौजूदा परिदृश्य् का आकलन करना और स्कूल क्षेत्र में शिक्षक शिक्षा के मुद्दों के सभी पहलुओं से निपटने के लिए व्यावहारिक समाधान उपलब्ध कराना है।

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jay narayan gupta
jay narayan gupta 10 साल 10 महीने पहले
जब भगवान जी को पता चला की अध्यापक को मेरे बराबर का दर्जा दिया जा रहा है तो उनको बहुत गुस्सा आया लेकिन उन्होंने अपने गुस्से का यों इज़हार किया "जाइये गुरु जी यदि आप अपने दायित्यो का पूर्ण निष्ठा के साथ पालन करेंगे तो लोग खुद ही आपको सर माथे पर बिठाएंगे और चारो तरफ आप की कीर्ति फैलेगी वो भले ही आपके बच्चों के रूप में क्यूँ न हो और यदि आपने कर्तब्य के निर्वहन में निष्ठा नहीं रखी तो वैसे ही आपकी कीर्ति अकीर्ति में बदल जाएगी और लोग आपको सरे राह चलते क्या क्या संबोधित करेंगे खुद देख लीजियेगा ,
jay narayan gupta
jay narayan gupta 10 साल 10 महीने पहले
"आज की तारीख में जो अध्यापक अपनी जॉब का २० % पूर्ण कर चुके है वो महीने में कम से कम १५ दिन ब्लैक बोर्ड पर चाक नहीं चलाते है जूनियर में तो आकड़ा और भी ख़राब है " मेरे अनुसार इसके शायद ये कारण हो सकते है १-छोटे बच्चो को पढाने में आलस्य से ग्रसित है २-अपने विषय का ज्ञान नहीं है ३- इन गाँव के बच्चो में कौन मूड मारे जब इन्हें पढना ही नहीं है ४-सिर्फ सैलरी के लिए स्कूल जाते है यदि आप सहमत है तो लाइक करे अन्यथा स्वयं विश्लेषण करे
Chaman Prakash
Chaman Prakash 10 साल 10 महीने पहले
In my opinion, we need to have a separate department of teacher education. Separate directorate and separate cadre of teacher educators. In Himachal Pradesh, any body can be a teacher educator even an untrained teacher also. Role of SCERTs, CTEs and DIETs has to be considered important. Hence these institutions has to be strengthened. Quality of good teachers always depend on quality of good teacher education institution. NCTE has to be serious in her role.