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भ्रामक विज्ञापनों के दुष्प्रभाव से निपटने में स्वैच्छिक उपभोक्ता संगठन की क्या भूमिका होनी चाहिए, इससे संबंधित सुझाव दें

आरंभ करने की तिथि :
Jan 01, 2015
अंतिम तिथि :
Jan 24, 2015
04:15 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
देशभर में व्यापार के विभिन्न क्षेत्रों में भ्रामक विज्ञापनों का ...
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513 सबमिशन दिखा रहा है
Lakshmipathy
11 साल 2 महीने पहले
Sir, Lot of corruption is going on even though if we have provided all the details to the dealer for registration of bank account for getting the subsidy in LPG, they are taking more money and are not providing the proper receipt for the same. In booking of cylinders and getting the cylinders also there is lot of corruption going on. Earlier procedure and conditions were much more better than the existing procedure. It is becoming difficult to get proper subsidy and number of cylinders on time.
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nabarun das
11 साल 2 महीने पहले
people has huge complains against gov,semi govt,private agencies.... give the people an officeal portal where the people can lodge the complain & the agencies can give reply & people can judge the matter....In addition where people can get the phone,e-mail id,gradation from reputed agencies will be available.....we are awaiting....
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rajesh dubey
11 साल 2 महीने पहले
अश्लील और भ्रामक विज्ञापनों को रोकने के लिए सरकार सुचना जनसम्पर्क विभाग को मजबूत बनाये देश के सभी जिले में जनसम्पर्क विभाग का कार्यालय मौजूद है जहा से आम आदमी की शिकायतों को संगृहीत किया जा सकता है मात्र हलके प्रचार प्रसार के जरिये उसके बाद संग्रह किये गए शिकायतों को निश्चित तिथि निर्धारित कर केंद्रीय सुचना जनसम्पर्क कार्यालय को भेजा जाये जहा शिकायतों का अविलम्ब निपटारा हो साथ ही केंद्र सरकार mygov.in पर भी शिकायत एकत्रित करे ?
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Devendra Singh
11 साल 2 महीने पहले
सरकार को सेंसर बोर्ड की तरह विज्ञापन के गुण दोष विवेचक बोर्ड का गठन करना चाहिए तथा प्रत्येक विज्ञापन को इस बोर्ड द्वारा review तथा अनुमोदन के पश्चात ही प्रसारण होना चाहिए। विज्ञापन को एक कोड (multi numerical ) बोर्ड द्वारा assign किया जाए। विज्ञापन के प्रसारण के समय यह कोड television की स्क्रीन पर प्रदर्शित हो एवम इसी के नीचे इस विज्ञापन को ब्लॉक करने का विकल्प रहे तथा इसे ब्लॉक करने का आधिकार उपभोक्ता का हो इस प्रकार किसी भी विज्ञापन पर उपभोक्ता का नियंत्रण होगा।
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AJAY KUMAR
11 साल 2 महीने पहले
ॐ हरि, इसके लिये तो एक आदेश का प्रचार ही काफी है --- कि भ्रामक ऐड के दोषी को भुक्तभोगी को १०० गुना मुआवजा और उतना ही धन सरकारी खाते में इसके साथ बिना बेल 6 माह की जेल होगी तथा केश की सीमा तीन माह ही होगी |
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prashant gwaliory
11 साल 2 महीने पहले
अर्थव्यवस्था के ईस दोर में विज्ञापनो द्वारा ग्राहको को बुरी तरह ठगा जा रहा हैं , विज्ञापन जारी करने से पहले , विज्ञापन में किऐ जा रहे दावो को जॉंच लिया जाऐ की कीऐ जा रहे दावे /ऐस्योरेंस उचीत हैं या नही !
यदी उचीत हैं तो विज्ञापन को अनुमती दी जावे और यदी विज्ञापन भ्रामक हैं तो अनुमती नही दी जावे ! विज्ञापन को टी.वी. पर प्रसारीत करने से पहले , रेग्युलेटरींग कमेटी हर हाल में बनाई जावे , यही ग्राहक हीत में होगा !
तथा प्रींट मीडीयॉ में भ्रामक विज्ञापन ना हो ईस हेतु कठोर गाईड लाईन तय की जाऐ
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MAHESH DUTTA MISHRA
11 साल 2 महीने पहले
RESPECTED SIR THERE ARE LOT OF PEOPLE BOOKED HOUSES UNDER THE SCHEME OF HOUSING BOARD AFFORDABLE SCHEME FOR (KAMJOR AYVARG) IN 2009 BUT TILL THE DATE HOUSING BOARD DIDN'T HAND OVER TO BOOKING HOLDER UN NECESSARY THEY ARE MAKING DELAY SO PLEASE TAKE NECESSARY ACTION ON THIS MATTER
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RAJESHA UPADHYAYA
11 साल 2 महीने पहले
Its given that last date to submit the comment is on 23rd January 2015. My concern is weather it is still open ? or continuing comments are going to be rejected ?
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NAGARAJA MK
11 साल 2 महीने पहले
ಸುಳ್ಳು ಜಾಹಿರಾತುಗಳನ್ನು ತಡೆಗಟ್ಟುವುದು ಇಂದು ಅತಿ ಅವಶ್ಯವಾಗಿದೆ. ಮುಖಬೆಲೆಗಿಂತ ಹೆಚ್ಚಿನ ಬೆಲೆ ತೆಗೆದುಕೊಳ್ಳುವುದನ್ನು ತಪ್ಪಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ. ವಸ್ತುವಿಗೆ ಅಧಿಕ ಬೆಲೆ ನಿಗದಿಗೊಳಿಸುವುದನ್ನು ತಪ್ಪಿಸಬೇಕಾಗಿದೆ.
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rishabh gupta
11 साल 2 महीने पहले
ad verification committee making by government .! one member of this having job fixed in press office
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