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माईगव नागरिक केंद्रित मंच को बेहतर बनाने हेतु विचार एवं सुझाव आमंत्रित

MyGov- नागरिक केंद्रित मंच को बेहतर बनाने हेतु विचार एवं सुझाव आमंत्रित
आरंभ करने की तिथि :
Oct 02, 2022
अंतिम तिथि :
Oct 31, 2022
23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)
प्रस्तुतियाँ समाप्त हो चुके

भारत में जनसहभागिता के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देने हेतु माननीय ...

भारत में जनसहभागिता के माध्यम से सुशासन को बढ़ावा देने हेतु माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा 26 जुलाई 2014 को माईगव की शुरुआत की गई थी। माईगव के आज 26 मिलियन से अधिक पंजीकृत यूजर्स हैं। इसे भारत सरकार के जनसहभागिता मंच के रूप में स्थापित किया गया है जो कि नीति निर्माण के लिए नागरिकों की राय के लिए कई सरकारी निकायों / मंत्रालयों के साथ सहयोग करता है और जनहित के मुद्दों / विषयों पर लोगों की राय लेता है। माईगव के ट्विटर, फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब और लिंक्डइन जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ-साथ कू, शेयरचैट, चिंगारी, रोपोसो और बोलो इंडिया जैसे कई भारतीय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भी लाखों सक्रिय फॉलोअर्स हैं।

माईगव देशवासियों की सहभागिता को और अधिक बढ़ाने के लिए नए विचारों एवं सुझावों को आमंत्रित करता है।

माईगव साथी निम्नलिखित विषयों पर अपने विचार और सुझाव साझा कर सकते हैं, लेकिन यह इन्हीं तक सीमित नहीं है:

1.माईगव वेबसाइट का डिजाइन लुक (यूजर इंटरफेस में सुधार)
2. MyGov.in पर यूजर्स के अनुकूल नेविगेशन (साइट पर सुविधाओं को ब्राउज़ करना और एक्सप्लोर करना आसान बनाना)
3. माईगव में नई सुविधाएं और सेवाएं (सुझाव)
4. यूजर रजिस्ट्रेशन में सुधार
5. फीडबैक मैकेनिज्म पर विचार (हम आपकी प्रतिक्रिया कैसे प्राप्त करते हैं)

प्रतिभागी विभिन्न मंत्रालयों की विभिन्न योजनाओं और कार्यक्रमों के बारे में जानकारी के साथ-साथ चल रही विभिन्न गतिविधियों के बारे में जानने के लिए MyGov (www.mygov.in) पर जा सकते हैं।

आपका योगदान भारत को एक विकसित राष्ट्र के रूप में बनाने में मदद करेगा। माईगव साथी की सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को भारत सरकार से मान्यता मिलेगी और उन्हें CEO माईगव से मिलने का मौका मिलेगा। साथ ही, सर्वश्रेष्ठ प्रविष्टियों को माईगव पेज पर प्रदर्शित किया जाएगा।

हम आपकी अधिक से अधिक भागीदारी की आशा करते हैं।

प्रविष्टि भेजने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर, 2022 है।

फिर से कायम कर देना
1363 सबमिशन दिखा रहा है
Amitabh Kumar Singh
Amitabh Kumar Singh 3 साल 8 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आज में अपने एक शोध कार्य के संबंद्ध में बाल और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 2016 की हिंदी प्रति खोज रहा था. पहले अंग्रेजी प्रति मिली और बाद में हिंदी. दोनो को पढ़ा तो काफी अंतर था. फिर समझ में आया कि मंत्रालय ने संशोधित अंग्रेजी प्रति को वेब-साइट पर अपडेट कर दिया है लेकिन हिंदी की पुरानी प्रति ही रखी है. फिर मैने सोच ई-गज़ट से हिंदी की प्रति ले लूं लेकिन वहां पर भी केवल अंग्रेजी प्रति थी. समझ में नही आया की वर्तमान सरकार में ऐसा कैसे संभव है. पूरा दिन यही खोज करने के बाद में इस निष्कर्ष पर पहुँचा कि आपको सूचित किया जाए. अगर सभी कानूनों की अद्यतन प्रति हिंदी और दूसरी भारतीय भाषाओं में भारत सरकार की वेब-साइट पर नही होगी तो आम आदमी को विश्वसनीय जानकारी कहाँ से मिलेगी. कृपया अपनी व्यवस्था में एक ऐसा तंत्र विकसित करें जहां एक टीम नियमित वेबसाइट की समीक्षा करें और जहां कहीं भी कमी हो उसे सुधार जाए. 2016 के कानून की हिंदी प्रति की जगह पुराण कानून वेब-साइट पर रखना एक आपराधिक कृत्य हैं क्योंकि यह नागरिकों को गलत कानूनी जमीन पर खड़ा रखता है.
jaihindpost
jaihindpost 3 साल 8 महीने पहले
माननीय महोदय , कितने साल लगेंगे कार्रवाई में , सबूत देने पर भी कोई ईमानदार अफसर नहीं है जो कार्रवाई करवा सके ये हाल है सिस्टम का , सरेआम फर्जीवाड़ा हो रहा है कोई सुनवाई नहीं हो रही है PMOPG/E/2022/0269800, PMOPG/E/2022/0273497
mygov_166575601115923521
K.A.Narayanankutty
K.A.Narayanankutty 3 साल 8 महीने पहले
Hospitals should exist in every village and the infrastructure could be made by government for doctors to practice as this is important for ever citizen rather than doctors Artificial township should be made along all Highways for rest rooms, general stores, hotels, recreation, fuel station and police aid posts all of which can be rented premises owned by the government or cooperative societies of locals.
Amitabh Kumar Singh
Amitabh Kumar Singh 3 साल 8 महीने पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, क्या यह संभव है कि सभी मंत्रालय और विभाग अपने कानूनों को अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी अपनी-अपनी वेब साइट पर रखें? मैं आज बाल और कुमार श्रम (प्रतिषेध और विनियमन) अधिनियम 2016 की हिंदी प्रति खोज रहा था. मंत्रालय में जो कानून की प्रति है वह पुरानी और अप्रासंगिक है. 2016 का संशोधन केवल अंग्रेजी गज़ट में हैं हिंदी प्रतिलिपि उपलब्ध नही. शेष भरतीय भाषाओं के बारे में क्या कहूँ. उम्मीद है कि कानून हिंदी के साथ-साथ दूसरी बहरतीय भाषाओं में भी वेब-साइट पर डालें जाएंगे. इससे सुशासन आसान और बेहतर बनाने में सहायता होगी. अगर मंत्रालय की वेब-साइट पर आज की तारीख में पुराण कानून होगा तो आम-आदमी किस चीज़ पर भरोसा करेगा. कृपया व्यवस्था में बदलाव जरूरी है और कोई होना चाहिए जो नियमित वेब-साइट पर डाली जाने वाली सामग्री की समीक्षा करता रहे और सीधे आपको रिपोर्ट करे.
Doctor Indrani Chakravarti
Doctor Indrani Chakravarti 3 साल 8 महीने पहले
मोदीजी के मन की बात सबके मन को छू जाती है। नयी शिक्षा नीति के बारे मे एक और सुझाव। नयी शिक्षा नीति गाँव के विद्यालयो के लिए अधिक प्रयोजनीय है। किंतु शिक्षक प्रशिक्षित नही हो तो बच्चे शिक्षित नही हो सकते । अतः सर्वप्रथम देश के समस्त गाँव के शिक्षको को नयी नीति से परिचित कर शिक्षण आरंभ हो तो अच्छा। इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए कलेक्टर, ग्राम प्रधान और एनजीओ की सेवा ली जा सकती है। अन्य कई देशों के विद्यालयो मे ऐसे ही शिक्षण दिये जाते है। फिर हम क्यों पिछड़े रहेंगे? आशा है माननीय प्रधान मंत्रीजी को मेरा सुझाव पसंद आयगा।
Rajya lakshmi Devarapalli
Rajya lakshmi Devarapalli 3 साल 8 महीने पहले
Respected Sir, Sir In this platform I thankful to a few people asking for gathering of Change Makers. It is really a nice idea Sir. Please think about it Sir. I also wanted to join with you all. But I don't know about the possibility and busy schedule of yours. Because time is very previous Sir. Mostly time of GOI. Thank you for the opportunity Sir. 🇮🇳Jai hind. Most respectfully, D.Rajyalakshmi.