मैं अपने आसपास के अनाथ,पितृहीन,अथवा गरीब बालिकाओं को रोजगार दिलाने हेतु कंपीटिशन की तैयारी करवाने अथवा कोई रोजगारपरक कोर्स हेतु निःशुल्क कोचिंग देने को तैयार हूं।कृपया कोई योजना से जुड़ने अथवा रोजगार में मदद हेतु कोई मार्गदर्शन प्रदान करने की कृपा करें।
मैं विद्यालय स्तर पर अथवा स्थानीय स्तर पर अनाथ एवं गरीब विद्यार्थियों के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कराने हेतु निशुल्क कोचिंग खोलना चाहता हूं।यदि शासन अनाथ एवं अति गरीब बच्चों के लिए कोई रोजगारपरक डिप्लोमा/ कोर्स भी प्रारंभ करना चाहे तो मैं उन्हें आजीवन निशुल्क पढ़ाने को तैयार हूं।कृपया कोई तरीका या माध्यम बताने की कृपा करें।
आदरणीय मोदीजी
आज युवा पढकर रोजगार मांग रहा है।क्राग्रेसं काल मे शिक्षा व्यवस्था गलत थी। छात्राओं को तंत्र ज्ञान की शिक्षा नही दिया। कांग्रेसी काल मे डिग्री की फैक्ट्री ओपन किया।बीस साल पहले अच्छी शिक्षा मिलती तो हमारे हाथों को तकनीकी जाॅब दस्तक देती। बेरोज़गारी का पचीस साल पहले नियोजन बना होता। तो आज यह नौबत नही आती।
आदरणीय प्रधानमंत्री जी
मन की बात के माध्यम से आप देश को संदेश दे सकते हैं कि देशभर के कम से कम स्कूलों में एक नई व्यवस्था लागू करें, जिससे बचपन में जातिवाद को लेकर थोड़ा दुराव कम किया जा सकता है। जैसे आप सभी निजी स्कूल संचालकों को आग्रह कर दें और सरकारी स्कूलों में व्यवस्था कर दें कि स्टूडेंट के नाम के साथ उसका सरनेम नहीं लिखें। जैसे मेरा नाम आलोक खण्डेलवाल है तो कक्षा में केवल आलोक नाम ही रहे, ताकि प्रारंभ से ही बच्चों में आरक्षण या अन्य कारणों से जो जातीय दुराव आ रहा है उसे कुछ हद तक रोका जा सके।
यदि स्कूल में नाम में केवल आलोक, रमेश, सुभाष जैसा ही रहेगा तो किसी को उसके वर्ग का अहसास नहीं रहेगा, जिससे प्रेम भाव बराबर बना रहेगा।